आखिर वही हुआ जिसकी संभावना जताई जा रही थी। रविवार को मतदाता सूची में गड़बड़ी और पर्ची वितरण में लापरवाही वोटरों पर भारी पड़ी। शहर हो या देहात हजारों लोग मतदान से वंचित हुए। लोग हाथ में मतदाता परिचय पत्र लेकर टहलते रहे, लेकिन वोट नहीं दे पाए। निर्वाचन आयोग की कई माह तक चली कवायद मतदान प्रतिशत बढ़ाने में फ्लाप साबित हुई। अफसरों की निगरानी के अभाव में बीएलओ की मनमानी वोटरों पर भारी पड़ी। बूथों पर मतदाता सूची में जबरदस्त खामियां पाई गईं। चौंकाने वाली बात यह रही कि मतदाताओं की शिकायत सुनने को कोई अफसर तैयार नहीं हुआ।
मतदाता सूची पुनरीक्षण केे बाद अनंतिम प्रकाशन किया गया। सर्वे के बाद करीब 40 हजार नए मतादाता सूची में शामिल हुए। बूथवार तैनात बीएलओ को वोटर पर्चियां बांटने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे निभाने में अधिकांश बीएलओ लापरवाह रहे। अमर उजाला ने रविवार के अंक में इस आशय की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। वहीं हुआ, जिसकी आशंका थी, हजारों लोग मतदान से वंचित रह गए। अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग न कर पाने वालों में प्रशासनिक व्यवस्था और बीएलओ के प्रति खासा आक्रोश है।
शहर पश्चिमी, दक्षिणी और उत्तरी के सैकड़ों मोहल्लों में लोग हाथ में वोटर आई कार्ड लेकर घूमते रहे। अटाला, राजरूपपुर, चकिया, करेलाबाग, अकबरपुर, दरियाबाद, एडीसी बेनीगंज, मजीदिया इस्लामिया कॉलेज, आर्दश नर्सरी स्कूल, बाबा पब्लिक स्कूल, केएन काटजू इंटर कॉलेज, नेता नगर प्राथमिक विद्यालय, कांजी खेतसी धर्मशाला, सेवा समिति विद्या मंदिर, भारत स्काउट एंड गाइड, सिविल लाइंस, जार्ज टाउन, मम्मफोर्डगंज समेत अन्य मोहल्लों और मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले अधिक आए।
वहीं ग्रामीण इलाकों में करछना के तरौल, मुंगारी, बरांव, करछना खास, चनैनी, पनासा समेत अन्य गांवों में वोटिंग लिस्ट की गड़बड़ी से मतदाता न केवल मायूस हुए बल्कि वोट भी नहीं दे सके। इन क्षेत्रों में सर्वाधिक शिकायत उन क्षेत्रों से रही, जहां महिला बीएलओ की तैनाती है। फूलपुर कई गांवों, घूरपुर, जसरा, सहसों, कोरांव, बारा समेत अन्य क्षेत्रों से भी मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतें आम रहीं। फूलपुर के हरिकिशन, सहसों के राम बदन ने बताया कि पर्चियां नहीं मिलीं, वोटर लिस्ट में नाम भी गुम हो गया। पास वोटर आई कार्ड है, लेकिन वोट नहीं दे सकते।
मतदाता जागरूकता अभियान की उम्मीदों पर बीएलओ ने लगभग हर जगह पानी फेर दिया। कई क्षेत्रों में मतदाता पर्ची बांटने में लापरवाही बरती गई। बीएलओ दावा करते रहे कि उन लोगों ने मतदाता पर्ची घर-घर पहुंचाई हैं, जबकि वास्तविकता इससे कोसों दूर है। जहां पर्ची बांटी गई, उसका प्रतिशत 50 से अधिक नहीं मिला। पार्षद रतन दीक्षित के मुताबिक मम्मफोर्डगंज, कटरा, कर्नलगंज समेत अन्य मोहल्लों में खानापूरी के लिए पर्चियां बांटी गईं। वहीं नई बस्ती कीडगंज की बुजुर्ग महिला चंदा देवी ने बताया कि वह बीमारी की हालत में बूथ तक गईं, लेकिन वोटर आई कार्ड होने के बाद भी वोट नहीं दे पाईं। इसी तरह श्याम, राजेश, शंकर, मालती, दिनकरी, सोमा देवी आदि भी वोटर लिस्ट में खामी की वजह से मताधिकार नहीं कर सकीं।
मतदाता सूची में गड़बड़ी का बड़ा मामला कोरांव के बसहरा मतदान केंद्र पर देखने को मिला। ग्रामीणों के साथ विभिन्न दलों के नेताओं ने बताया किया यहां कुल 6000 वोटर थे। रविवार को वोटर लिस्ट देखने पर पता चला कि अब 6000 नहीं सिर्फ 3212 वोटर ही बचे हैं। मतदाताओं के नाम कैसे कटे, किसके निर्देश पर काटे गए, यह बताने वाला कोई नहीं था। वहीं वोटर पर्ची न बंटने और मतदाता परिचय पत्र और सूची में भिन्नता के कारण सैकड़ों लोग बिना वोट दिए लौट गए। इनमें तो 300 लोग घंटों लाइन लगाने के बाद मायूस होकर लौटे।
शहर के केएन काटजू, सेवासमिति, केपी इंटर कॉलेज, भारत स्काउट, बीएचएस समेत कई केंद्रों पर भाजपाइयों ने हाईटेक तकनीक से वोटरों की मदद की। ऐसे मतदाताओं को जिन्हें पर्ची नहीं मिली या वोटर लिस्ट में नाम नहीं दिखा और मतदाता परिचय पत्र लेकर आए बहुत लोगों को वोट देने को पर्ची जारी की गई। कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के एप पर कार्ड नंबर डालकर डिटेल निकाला और मतदान के लिए पर्ची बनाकर दी। लोगों ने भाजपा के इस प्रयास को सराहा।