तीर्थराज प्रयाग में मूल अक्षयवट के दर्शन बंद नहीं होंगे। सरकार के आग्रह पर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए मूल अक्षयवट को आगे भी खुला रखने के लिए उच्चस्तरीय निर्णय ले लिया गया है। सेना के साथ प्रशासन की बैठक के बाद इस आशय का सहमति पत्र जारी कर दिया गया है। इसी के साथ अक्षयवट को खोलने को लेकर बने असमंजस पर विराम लग गया है। इससे पहले कुंभ मेला के तहत 31 मार्च तक केलिए ही मूल अक्षयवट और सरस्वती कूप को खोलने का निर्णय लिया गया था।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर विचार-विमर्श केबाद शीर्ष स्तर पर मूल अक्षयवट को आगे भी लगातार खुला रखने का निर्णय ले लिया गया है। कुंभ के दौरान मूल अक्षयवट के दर्शन के लिए की गई व्यवस्थाएं यथावत बनी रहेंगी। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक पूर्व की भांति श्रद्धालु मूल अक्षयवट व सरस्वती कूप के दर्शन कर सकेंगे। यह जानकारी मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने दी।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में उच्चस्तरीय निर्णय ले लिया गया है। सेना के साथ हुई प्रशासन की बैठक में तय किया गया है कि कुंभ की तरह ही आम भक्तों के लिए मूल अक्षयवट के दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए सुलभ हो। प्रधानमंत्री के एलान पर 450 वर्ष बाद खोले गए सनातनधर्मियों के इस अहम तीर्थ को कुंभ के बाद भी यथावत रखने पर अब तक संशय के बादल छाए हुए थे। सेना के साथ हुई बैठक के बाद जिलाधिकारी भानुचंद गोस्वामी ने बताया कि मूल अक्षयवट और सरस्वती कूप को आने वाले दिनों में भी खुला रखने का निर्णय लिया गया है। उल्लेखनीय है कि कुंभ के दौरान प्रयागराज में हुई कैबिनेट की बैठक में मूल अक्षयवट को आम श्रद्धालुओं के लिए वर्ष पर्यंत खोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया गया था।