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ट्रस्ट गठन को लेकर तीर्थ पुरोहितों से भी मांगे जाएंगे सुझाव

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Prayagraj sangam trust - फोटो : CITY DESK
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तीर्थ पुरोहितों के साथ सेना के अफसरों की हो सकती है बैठक
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प्रयागराज। प्रयागराज में संगम क्षेत्र के लिए सेना द्वारा ट्रस्ट बनाने को लेकर शुरू की गई प्रक्रिया में सेना द्वारा तीर्थ पुरोहितों का भी सहयोग लेगी। ट्रस्ट गठन के पूर्व सेना द्वारा तीर्थ पुरोहित के साथ बैठक की जा सकती है। चर्चा है कि बैठक में सेना तीर्थ पुरोहितों के सुझाव भी लेगी। तीर्थ पुरोहितों की सेना से क्या अपेक्षा है, उसे लेकर भी विचार विमर्श होने की बात कही जा रही है।
दरअसल, तिरुपति और वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर प्रयागराज में भी संगम क्षेत्र के लिए ट्रस्ट बनाने की तैयारी है। यहां ट्रस्ट सेना द्वारा बनाया जाएगा। ट्रस्ट बनने के बाद सेना द्वारा जहां तीर्थपुरोहितों का पंजीकरण किया जाएगा तो वहीं उन्हें संगम क्षेत्र में बैठने के लिए स्थायी स्थान भी उपलब्ध करवाया जाएगा। इस दौरान प्रसाद, पूजन अर्चन, पिंड दान आदि का क्या रेट होगा, वह ट्रस्ट ही तय करेगा। इसकी रसीद काटी जाएगी। उसी रसीद के हिसाब से यजमान तीर्थ पुरोहितों को भुगतान करेंगे। सेना अफसरों का कहना है पूजन अर्चन आदि कार्यक्रम के बाद अगर यजमान अपनी स्वेच्छा से तीर्थ पुरोहितों को दान करता है उसमें उन्हें कोई आपत्ति नहंीं होगी। सेना मंथन कर रही है कि ट्रस्ट का नाम क्या रखा जाए। उधर सेना ने स्पष्ट किया है कि ट्रस्ट में तीर्थ पुरोहित, नाविक, स्थानीय दुकानदार आदि के साथ जिला प्रशासन का भी प्रतिनिधित्व रहेगा।
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धार्मिक कार्यों में सेना कीदखल का कोई औचित्य नहीं
ट्र्स्ट बनाए जाने को लेकर तीर्थपुरोहितों ने जताई असहमति
-राष्ट्रपति को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध, आंदोलन की चेतावनी
प्रयागराज। संगम क्षेत्र में सेना की ओर से ट्र्स्ट बनाए जाने को लेकर तीर्थपुरोहितों ने असमति जताई है। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के महासचिव चंद्रनाथ चकहा ‘मधु चकहा’ ने दो टूक कहा कि सेना की इस पहल का तीर्थपुरोहित पुरजोर विरोध करते हैं। धार्मिक कार्यों में सेना की दखल का कोई औचित्य नहीं है। तीर्थपुरोहितों ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर उक्त मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि तीर्थपुरोहितों के मामले की कोई सुनवाई नहीं हुई तो उक्त कार्यवाही की विरोध में तीर्थपुरोहित अहिंसावादी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सेना और मेला प्राधिकरण की होगी। बैठक में हरिजगन्नाथ शास्त्री, श्रवण कुमार शर्मा, ओमप्रकाश पांडेय बड़े भइया, श्याम जी मिश्र, प्रकाश चंद्र मिश्र, माधव शर्मा, विष्णु शर्मा आदि मौजूद थे।
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वहीं प्रयागवाल सभा के पूर्व अध्यक्ष अजय पांडेय तथा महामंत्री राजेंद्र पालीवाल ने भी सेना की पहल का विरोध करते हुए घोषणा की तीर्थ पुरोहित समाज, प्रयागवाल तख्त को सेना की सीमा से बाहर स्थापित करेगा क्योंकि ट्रस्ट जहां भी निर्मित है वहां पूर्ण रूप से स्थायी व्यवस्था है न कि अस्थायी रूप से बसने पर। ऐसे में अस्थायी बसेरे को ट्रस्ट से जोड़ने का कोई औचित्य ही नहीं है ।
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