‘सो दरु केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब समाले’...के मूलमंत्र को अपनाने वाले निर्मल अखाड़े के पंजाबी संतों का शाही स्नान और पेशवाई के अधिकार के लिए नागाओं के साथ भीषण युद्ध का इतिहास रहा है। गुरु ग्रंथ साहिब को अपना गुरु और गुरु नानक देव को देवता मानने वाले निर्मल अखाड़े में श्रीमहंत ही सर्वेसर्वा होते हैं।
इस अखाड़े की स्थापना संवत 1564 में सुल्तानपुर के लोधी में वेईं नदी के संत घाट पर हुई थी। निर्मल संप्रदाय के ग्रंथों में इस अखाड़े के वैभव, पराक्रम और परंपरा का विस्तार से उल्लेख है। पंचायती अखाड़ा निर्मला नामक पोथी में कहा गया है कि निर्मल संप्रदाय की उत्पत्ति गुरु नानक देव ने स्वयं की थी।
इसके मुताबिक, गुरु नानक देव वेईं नदी में स्नान कर सचखंड (बैकुंठ धाम) पहुंचे और प्रभु की स्तुति की। ईश्वर ने प्रसन्न होकर जगत के कल्याण के लिए गुरु नानक देव को निर्मल लिबास देकर भेजा था। इसी वेश में गुरुनानक देव जब संत घाट पर पहुंचे तो वहां भाई भगीरथ पहले से तीन दिन से व्रत धारण किए खड़े थे। गुरु नानक देव ने प्रेम, श्रद्धा, भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें जीवन का मूलमंत्र दिया।
निर्मल वेश देते हुए कहा था कि यह अकाल पुरुष की अनमोल देन है, जिसे हम सबसे पहले आपको दे रहे हैं। अखाड़े के सचिव श्रीमहंत देवेंद्र सिंह शास्त्री बताते हैं कि अखाड़े से पांच हजार से अधिक सिख संत जुड़े हैं। 18वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हरिद्वार कुंभ में शाही स्नान के अधिकार के लिए निर्मल अखाड़े के संतों ने नागाओं के साथ युद्ध तक किया था।
ओंकार चिह्न वाला ध्वज और पगड़ी अखाड़े की पहचान
पंचायती निर्मल अखाड़े का ध्वज भी सबसे अलग है। इस अखाड़े का ओंकार चिह्न वाला ध्वज पहचान माना जाता है। इसके अलावा सभी संतों के लिए पगड़ी और केश, कड़ा धारण करना अनिवार्य है।
महाकुंभ : केंद्र ने स्वीकृत किए 2,100 करोड़
लखनऊ। प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी के बीच होने जा रहे सबसे बड़े सांस्कृतिक व आध्यात्मिक समागम महाकुंभ के लिए केंद्र सरकार ने 2,100 करोड़ का विशेष अनुदान स्वीकृत कर दिया है। इसमें से 1050 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी भी कर दी गई है। इससे महाकुंभ का आयोजन दिव्य, भव्य व डिजिटल तरीके से करने में सहायता मिलेगी।
- बता दें कि प्रदेश सरकान ने केंद्र से एकमुश्त विशेष सहायता अनुदान के लिए अनुरोध किया था। प्रदेश सरकार 5435.68 करोड़ महाकुंभ के आयोजन पर खर्च कर रही है। यह राशि 421 परियोजनाओं पर खर्च की जा रही है। प्रदेश सरकार अब तक 3461.99 लाख की वित्तीय स्वीकृति जारी कर चुकी है।