2021 से चल रहा है मनी लॉन्ड्रिंग का केस
ईडी ने 2021 में अतीक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। जांच के दौरान ही अतीक व उसकी पत्नी की तीन करोड़ की संपत्तियां भी जब्त की थी। उमेश पाल हत्याकांड के बाद अप्रैल में ईडी ने अतीक के करीबी बिल्डरों, मददगारों व चार्टर्ड अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापा मारकर भारी मात्रा में नकदी व अन्य सामान बरामद भी किया था।
मामले की जांच ईडी के सब जोनल कार्यालय प्रयागराज की टीम कर रही थी। पिछले साल नवंबर में यह मामला दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय की एसटीएफ को ट्रांसफर कर दिया गया था। इसकी वजह आधिकारिक रूप से तो सामने नहीं आई। हालांकि, चर्चा थी कि अतीक के कुछ करीबी बिल्डरों ने भ्रष्टाचार की शिकायत की थी।
ईडी ऐसेे करेगी जांच
-ईडी एसटीएफ की ओर से पहले इस संपत्ति का पूरा विवरण निकाला जाएगा।
-संपत्ति के मौजूदा मालिक को बुलाकर पूछताछ व बयान दर्ज किया जाएगा।
-इस मामले में बैनामे में रहे गवाहों का भी बयान दर्ज किया जाएगा।
- जांच में यह पाया जाता है कि संपत्ति अपराध से अर्जित की गई तो इसे अस्थायी तौर पर अटैच करने की कार्रवाई की जाएगी।
आयकर विभाग इसकी करेगा पड़ताल
-बेनामी निषेध इकाई पहले संपत्ति का पूरा विवरण एकत्र करेगी।
-संपत्ति के लिए भुगतान करने वाले व्यक्ति की जानकारी जुटाएगी।
-भुगतान कैसे किया गया।
-नोटिस जारी कर वर्तमान मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
-जरूरत पड़ने पर आईओ 90 दिनों के लिए बेनामी संपत्ति को जब्त भी कर सकता है।
मामला अपराध से अर्जित आय से संपत्ति बनाने व बेनामी संपत्ति का है। गौसपुर कटहुला में स्थित 12.42 करोड़ की इस संपत्ति को गैंगस्टर एक्ट में कुर्क किया गया है। साथ ही इसके संबंध में रिपोर्ट ईडी एसटीएफ व डीसी, बेनामी निषेध इकाई, आयकर विभाग को भी भेजी गई है। - दीपक भूकर, डीसीपी नगर