भाजपा के सिंबल पर ही लड़ेंगे चुनाव
49 वर्षीय पीयूष रंजन सिविल लाइंस पीडी टंडन रोड निवासी हैं। पीयूष ने बताया कि करछना सीट निषाद पार्टी को मिली है, लेकिन चुनाव में सिंबल भाजपा का ही रहेगा। वहीं दूसरी पूर्व विधायक महेश नारायण सिंह के पुत्र प्रशांत सिंह बहादुरपुर विकासखंड के जुनेदपुर गांव के निवासी हैं। महेश नारायण 2002 और 2012 में सपा के टिकट पर हंडिया में विधायक बने थे।
2013 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र प्रशांत सिंह को सपा ने टिकट दिया और वह विजयी हुए। 2017 के चुनाव में सपा ने प्रशांत सिह को टिकट नहीं दिया था। फिलहाल प्रशांत अब भाजपा-अपना दल-निषाद पार्टी गठबंधन से हंडिया में ताल ठोकेेंगे। प्रशांत की मां शकुंतला सिंह वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं।
संजय निषाद को गठबंधन में शामिल करने का मिला इनाम
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद को भाजपा गठबंधन में शामिल करने में पीयूष रंजन का भी योगदान है। सीएम योगी आदित्यनाथ से संजय निषाद की मुलाकात पीयूष रंजन ने कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह की मौजूदगी में करवाई थी।
करछना सीट से पूर्व विधायक और सांसद केशरी देवी पटेल के पुत्र दीपक पटेल का भी नाम चल रहा था, लेकिन निषाद वोटरों को साधने के लिए पार्टी ने यह सीट निषाद पार्टी को दे दी। हालांकि निषाद पार्टी को करछना विधानसभा सीट भले ही भाजपा ने दे दी हो लेकिन समझौते के तहत वहां से प्रत्याशी भाजपा का ही चुनाव में खड़ा किया गया है।
उधर, पीयूष रंजन निषाद को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद करछना में दीपक पटेल के समर्थकों की नाराजगी बढ़ गई है। दरअसल दीपक पटेल इस विधानसभा से एक बार विधायक बन चुके हैं और उन्होंने बसपा के टिकट पर उज्ज्वल रमण को ही शिकस्त दी थी। ऐसे में पीयूष रंजन को अब पटेल वोटरों को साधने के लिए भी पूरा प्रयास करना पड़ सकता है।