यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने कोरोना संदिग्ध के कोरेन्टाइन सेन्टर में व्याप्त गंदगी व अव्यवस्था को लेकर कायम जनहित याचिका पर दिया है। अधिवक्ता गौरव कुमार गौर ने कोर्ट को कोरोना से मृत इंजीनियर की पत्नी के वीडियो के आधार पर हस्तक्षेप करने की मांग की थी। वीडियो मे सेन्टर में फैली गंदगी को दिखाते हुए प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।
कोर्ट ने सरकार से जानकारी मांगी थी। सोमवार की सुनवाई के दौरान दिवंगत इंजीनियर की पत्नी की ओर से एक पत्र कोर्ट में भेजा गया। पत्र में कहा गया है कि इंजीनियर के उपचार ओर बचाव के लिए डाक्टरों की ओर से पर्याप्त प्रयास किए गए, हालांकि क्वारंटीन सेंटर के वीडियों में सेंटर की दुर्दशा की झलक मिलती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि इंजीनियर को बचाने के लिए किए गए प्रयास पर्याप्त थे।
सरकार की तरफ से व्यवस्था में सुधार सहित इलाज की व्यवस्था की ई मेल से जानकारी दी गई।। बताया गया कि 11 सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई है। एसआरएन सहित कोर्ट ने जिले में मौजूद 11 सरकारी अस्पतालों की सूची सरकार को दी है। कोर्ट ने याचिका को जारी रखते हुए इन अस्पतालों की व्यवस्था का व्योरा तलब किया है। अगली सुनवाई 14 मई को होगी