कानपुर से पीछे लग गए थे बदमाश
कानपुर के लग गए थे पीछे योजना के तहत, आरोपियों ने कानपुर के कुछ व्यापारियों से बात भी कर ली कि कॉपर आदि जैसी कीमती धातु वह आधे दाम पर दे देगें। लूट करने से पहले कानपुर-प्रयागराज मार्ग पर इन लोगों ने रेकी भी कर ली थी। इसके बाद 15 मई को अर्टिगा कार से कॉपर लदे ट्रक का कानपुर से पीछा करना शुरू किया। फिर कोखराज से आगे प्रयागराज जाने वाले मोड़ तिराहा के आगे ट्रक रोक लिया। साथ ही चालक सांवरलाल की हत्या करने के बाद तीनों अपनी कार व ट्रक को लेकर वापस कानपुर की तरफ बढ़े। रास्ते में ककोढा से आगे सुनसान स्थान पर चालक का शव व घटना में प्रयुक्त असलहा भी फेंक दिया। फिर ट्रेलर को एक सुनसान स्थान पर ले जाकर खड़ा कर दिया।
इंडोनेशियाई सिमकार्ड से बात करता था मारा गया बदमाश
ट्रेलर चालक की हत्या करने वाले बदमाश शातिर किस्म के थे। वे पुलिस से बचने के लिए वीओआईपी एप के जरिए वाईफाई कॉलिंग करते थे। यही नहीं, मुठभेड़ में मारा गया बदमाश संतोष इंडोनेशिया का सिमकार्ड का इस्तेमाल करता था। उसके पास यह सिम कहां से आया, पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार मारे गए संतोष के पास से जो मोबाइल बरामद हुआ है, उसका सिमकार्ड इंडोनेशिया का है। साथियों से संपर्क के बारे में पूछने पर उसने मोबाइल में वीओआईपी एप दिखाया। बताया कि इसी एप से वह वाईफाई के जरिए बातचीत करते थे, ताकि पुलिस उनकी लोकेशन को ट्रेस न कर सके।
जवाबी फायरिंग में मारा गया था मास्टरमाइंड
उन्होंने लूटे गए कॉपर वायर को आधे दाम पर बेचने के लिए कानपुर के स्थानीय व्यापारी मो० अकरम, शकील अहमद, अमित कुमार, आफताब से बातचीत भी कर ली थी। रंजीत को माल बिकने के बाद हिस्सा मिलने की बात कहकर वापस भेज दिया। 17 मई को लूटे गए कॉपर वायर को खरीदने के लिए उपरोक्त व्यापारी मौके पर संतोष राजभर उर्फ राजू के पास आए, जिस पर उनको कोखराज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
गिरफ्तारी के बाद घटना में प्रयुक्त अवैध असलहे की बरामदगी के लिए ले जाते वक्त संतोष ने पुलिस पार्टी पर झाड़ी में छिपाए गए असलहे से फायरिंग शुरू कर दी गई। जवाबी फायरिंग में संतोष घायल हो गया था, जिसे अस्पताल में डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। इसकी जानकारी के बाद ही कार्तिक भागकर पटियाला चला गया और लुकछिप कर रहने लगा था। एसटीएफ अफसरों ने बताया कि आरोपी पर पहले से छह मुकदमे दर्ज हैं, जो जौनपुर के हैं।
चालक को दिया था मिलीभगत का ऑफर
बदमाशों ने पहले चालक से मिलीभगत कर वाहन को हवाले करने की बात कही थी। साथ ही उसे काॅपर बेचकर हिस्सा देने का लालच दिया था, पर जब उन्हें मालूम चला कि चालक स्वयं वाहन का मालिक है और उसने रेलवे का काॅपर वायर लुटवाने से इंकार किया तो बदमाशों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। फिर शव को ठिकाने लगाकर वाहन लेकर फरार हो गए थे। पुलिस के अनुसार लूट में शामिल बदमाश संतोष उर्फ राजू ने माैत से पहले स्वयं इसका खुलासा किया है।
पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ में मारे गए बदमाश संतोष उर्फ राजू ने मौत के पहले पुलिस की पूछताछ में लूट की वारदात स्वीकार करने संग कई अन्य खुलासे किए। थानाध्यक्ष चंद्रभूषण मौर्य ने बताया कि मुठभेड़ में मारा गया बदमाश साथियों संग हाईवे पर माल लदे वाहनों को पहले मिलीभगत कर लूट का प्रयास करते थे। बात नहीं बनने पर लूट या फिर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे।
बदमाश के संपर्क में आए चार कबाड़ी भी गिरफ्तार, तीन कानपुर व एक प्रयागराज का निवासी
मुठभेड़ के पहले पकड़े गए बदमाश संतोष उर्फ राजू ने बताया था कि वारदातों को अंजाम देने के पहले उसकी मुलाकात वर्ष 2016 में मुंबई के रहने वाले इम्तियाज से हुई। उसने कॉपर तार, डीजल, पेट्रोल व अन्य माल लदी गाड़ियों में चोरी व लूट की घटना को अंजाम देने की सलाह दी थी। इम्तियाज ने कानपुर रेल बाजार अंतर्गत चुन्नीलाल चौराहा के शकील से मुलाकात भी कराई। संतोष को शकील ने विश्वास दिलाया था कि वह चोरी व लूट के माल खरीदेगा।
इसके बाद सक्रिय हुई कोखराज पुलिस ने शकील को गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ में साथी कबाड़ी मो. अकरम निवासी बाबू पुरवा कानपुर, अमित कुमार निवासी गल्ला मंडी नौबस्ता कानपुर और प्रयागराज के एयरपोर्ट अंतर्गत कटहुला निवासी आफताब का नाम प्रकाश में आया था। पुलिस ने सभी आरोपियों को उनके घर व दुकान से गिरफ्तार कर जेल भेजा चुकी है।