संगम क्षेत्र में आने वाले सभी तरह के वाहनों से शुल्क लिया जाएगा। वाहन शुल्क लेने की व्यवस्था 15 जुलाई से लागू हो जाएगी। रामघाट रोड और लेटे हुए हनुमान मंदिर के पास शुल्क लेने के बाद ही वाहनों को संगम क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति होगी।
वाहन पार्किंग के लिए छावनी परिषद, सेना, रक्षा संपदा और मेला प्रशासन की संयुक्त टीम स्थान का चयन करेगी। जुलाई के पहले सप्ताह में पार्किंग स्थल निर्धारित किया जा सकता है। यह निर्णय सोमवार को छावनी परिषद बोर्ड की बैठक में लिया गया।
दरअसल बोर्ड के सदस्यों ने पिछले वर्ष ही संगम क्षेत्र में वाहन शुल्क का फैसला ले लिया था, लेकिन माघ मेला और उसके बाद लॉक डाउन की वजह से वहां वाहन शुल्क की व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी। बैठक में वाहन शुल्क की पूर्व में तय की गई दरों पर भी चर्चा हुई। तय हुआ कि जो दरें पूर्व में निर्धारित की गईं थीं, उसे ही लागू किया जाएगा।
इसके अलावा बोर्ड बैठक में परिषद द्वारा आवंटित दुकानें और ठेके की मियाद भी तीन माह के लिए बढ़ा दी गई। छावनी परिषद के सीईओ माने अमित कुमार बाबूराव ने बताया कि लॉक डाउन की वजह से सबकुछ बंद होने के चलते ही आवंटित दुकानों और ठेके की मियाद बढ़ाने का निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियरआरपी सिंह ने की। बैठक में उपाध्यक्ष अरुण कुमार सोनकर के साथ प्रीति जैसवार, कुसुम लता, रंजना, मुकेश यादव, जानी बाबू सोनकर, जितेंद्र आदि मौजूद रहे।
वोटर लिस्ट का प्रकाशन एक जुलाई को
बैठक में बताया गया कि छावनी क्षेत्र की वोटर लिस्ट का प्रकाशन एक जुलाई को होगा। इस बार सभी अवैध लोगों को बाहर करने के साथ वोटर लिस्ट में तकरीबन 16 हजार लोगों को शामिल किया गया है।
संगम क्षेत्र में अब नहीं होगी मोबाइल नेटवर्क की समस्या
छावनी परिषद बोर्ड की बैठक में तय हुआ संपूर्ण छावनी परिषद क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क बेहतर करने के लिए 16 स्थानों पर टॉवर लगाए जाएंगे। इसमें से दो टॉवर संगम क्षेत्र में लगाए जाएंगे। एक टॉवर कृष्णा उद्यान एवं दूसरा टॉवर सरस्वती घाट के पास लगाया जाएगा। सीईओ ने बताया कि सरस्वती घाट पर जल्द ही कैफेटेरिया खोल दिए जाएंगे। यहां एक फूलों की वाटिका भी बनाई जा रही है।
गेट लगाने के प्रस्ताव पर वोटिंग से हुआ निर्णय
छावनी परिषद बोर्ड की बैठक में सोमवार को पूनप्पा रोड पर गेट लगाए जाने का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव पर बोर्ड के सात सदस्यों ने अपनी असहमति जताई। इसके बाद वह बैठक से बाहर निकल आए। सदस्यों को बाहर जाता देख तय हुआ कि इस प्रस्ताव पर वोटिंग करवाई जाए।
मतदान में कैंट बोर्ड की जनता द्वारा चुने गए सात सदस्यों के साथ सेना की ओर से नामित पांच सदस्यों ने शिरकत की। बताया जा रहा है कि सात में से दो सदस्य जो पहले गेट निर्माण का विरोध कर रहे थे, उन्होंने इसके समर्थन में अपना मत दे दिया। कुल 12 में से सात मत गेट निर्माण के पक्ष में आने के बाद तय हुआ कि वहां गेट बनेगा।