जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कहा कि केवल एफआईआर दर्ज कराने में देरी के आधार पर बीमा के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। बाइक चोरी के मामले में इंश्योरेंस कंपनी बीमाधारक को बीमा राशि ब्याज सहित अदा करे। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम और सदस्य सरला की पीठ ने अरुण कुमार द्विवेदी की ओर से दायर परिवाद पर दिया।
करछना के धरवारा (हनुमानपुर) निवासी अरुण कुमार द्विवेदी ने आरोप लगाया था कि उनकी बाइक 17 जुलाई 2014 को करछना तहसील परिसर से चोरी हो गई थी। एफआईआर दर्ज कराने के बाद पुलिस ने जांच की पर वाहन नहीं मिला। अंतिम रिपोर्ट न्यायालय की ओर से स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने बीमा कंपनी के समक्ष दस्तावेज और वाहन की चाबी जमा कर दावा प्रस्तुत किया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।
बीमा कंपनी ने आयोग में दलील दी कि चोरी की रिपोर्ट दो दिन बाद दर्ज कराई गई थी। इसलिए दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह भी कहा कि कुछ आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए। आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के गुरशिंदर सिंह बनाम श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और अशोक कुमार बनाम न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के निर्णयों का हवाला दिया। कहा कि जब चोरी की घटना वास्तविक हो, एफआईआर दर्ज हो, पुलिस की अंतिम रिपोर्ट न्यायालय से स्वीकार हो चुकी हो और चोरी का दावा सही पाया गया हो तो केवल सूचना या एफआईआर में देरी के आधार पर बीमा दावा अस्वीकार नहीं किया जा सकता।
आयोग ने कहा कि बाइक का बीमित घोषित मूल्य 28 हजार रुपये था। बीमा कंपनी के दिशानिर्देशों के अनुसार याची को आईडीवी का 75 प्रतिशत यानी 21 हजार रुपये, परिवाद दाखिल करने की तिथि से अंतिम भुगतान तक आठ प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया गया। साथ ही 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और पांच हजार रुपये वाद व्यय भी दो माह के भीतर भुगतान करने को कहा है।