मानसून सिर पर है और अलोपीबाग पंपिंग स्टेशन की स्थिति बदहाल पड़ी है। डीएम का आदेश भी गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों पर बेअसर साबित हुआ। पंपिंग स्टेशन में काम के नाम पर लोहे के सड़े पाइप पर सीमेंट लगाई गई है। मोटरें खुली पड़ी हैं। 650 केवी का ट्रांसफार्मर अभी तक मरम्मत के लिए वर्कशाप में है। ऐसे में तेेज बारिश पर शहर की बड़ी आबादी का जलभराव से जूझना तय है।
पंपिंग स्टेशन अलोपीबाग की मरम्मत के लिए फरवरी में ही निर्देश जारी किए गए थे। इंजीनियरों की रिपोर्ट थी कि पंपिंग स्टेशन से राजापुर एसटीपी गंदा पानी जिस पाइप से भेजा जाता है, वह सड़ चुका है। पाइप बदलने की संस्तुति के बाद भी अफसर नहीं चेते। मई महीने में जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर डीएम ने जीएम गंगा प्रदूषण को पंपिंग स्टेशन का काम प्राथमिकता के आधार पर 15 जून तक पूरा कराने का निर्देश दिया था।
वरिष्ठ पार्षद कमलेश सिंह के मुताबिक करीब 20 दिन पहले ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए भेजा गया। दो दिन पहले सड़ा पाइप बदलने की जगह क्षतिग्रस्त स्थान पर सीमेंट पोत दी गई। यह पाइप एक झोंका भी नहीं सह पाएगा। मोटरें और ट्रांसफार्मर फिर जल जाएंगे। इस संबंध में जानकारी देने के लिए कार्यवाहक जीएम तमाम प्रयास के बाद नहीं मिले। उनके मातहतों ने बताया कि कंपनी ट्रांसफार्मर देगी तब तो लगाएंगे। अब तक क्या कर रहे थे, यह पूछने पर उनका कहना है कि सरकारी काम में देर लगती है।
मोरी गेट में रिसाव, बक्शी बांध पर दो पंप खराब
मोरी गेट का लीकेज रोकने के लिए जलकल विभाग ने जलनिगम और सीएनडीएस के तकनीकी अफसरों से मंत्रणा कर वेल्डिंग कराई है। इस प्रयास के बाद भी लीकेज रुका नहीं। वहां पानी रिस रहा है, जो तेज बारिश में मुसीबत का कारण बनेगा। वहीं बक्शी बांध पर स्थापित पंपों की मरम्मत की गई, लेकिन दो पंप अभी खराब हैं।
बक्शी बांध और मोरी गेट के साथ अन्य पंपिंग स्टेशनों की मरम्मत में लापरवाही की खबर मंगलवार को अमर उजाला ने उजागर की तो मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने नगर निगम और जलकल अधिकारियों को मौके का मुआयना कर तुरंत मरम्मत कार्य कराने का निर्देश दिया।
जलकल जीएम हरिश्चंद बाल्मीकि, अधिशासी अभियंता पुरुषोत्तम, सौरभ श्रीवास्तव टीम के साथ मौके पर पहुंचे। 24 घंटे में एक सफलता मिली कि क्षतिग्रस्त पाइप मरम्मत करने के बजाय बदल दिए गए। वहीं पंपों की मरम्मत भी कराई गई। इन स्थानों पर जो कार्य सीएनडीएस ने कराए, उसके लिए प्रोजेक्ट मैनेजर को मौके पर बुलाया गया। वरिष्ठ पार्षद कमलेश सिंह का कहना है कि अब मोरी गेट का लीकेज बालू की बोरियां लगाकर ही रोकना पड़ेगा।
तेज बारिश से जलभराव का खतरा टला नहीं है। यहां करीब 50 लाख की लागत से स्थापित नए पंप की जाली तली से डेढ़ मीटर ऊपर लगाने से निष्प्रयोज्य रहेगी। वहीं सीएनडीएस के अफसरों का तर्क है कि यदि तली से सटाकर पंप की सेटिंग की जाएगी तो कचरा फंस जाएगा। ऐन मौके पर इस तरह के दावे शहरियों पर भारी पड़ सकते हैं। वहीं नगर आयुक्त रवि रंजन ने सभी पंपों की रिपोर्ट तलब की है।