कोरोना के लगातार बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जवानों के साथ ही फरियादियों को बीमारी से बचाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत प्रत्यक थानों में हेल्पडेस्क स्थापित कर दी गई है। यहां न सिर्फ पुलिसकर्मियों बल्कि फरियादियों की भी जांच होगी और इसके बाद ही उन्हें थाने के भीतर प्रवेश दिया जाएगा।
अन्य लोगों के साथ ही पुलिस विभाग की कोरोना संक्रमण से अछूता नहीं रह गया है। जीआरपी के कई जवानों के साथ ही जिला पुलिस के भी अफसर-जवान संक्रमित हो चुके हैं। खुद पूर्व एसएसपी भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। रोज सैकड़ों लोगों के संपर्क में आने की वजह से पुलिसकर्मियों के कोराना से संक्रमित होने का खतरा सबसे ज्यादा है।
इसी को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत जिले के हर थाने में कोरोना हेल्पडेस्क स्थापित की गई है। इसमें एक महिला व एक पुरुष कांस्टेबल की ड्यूटी लगाई गई है। डेस्क पर थर्मल स्कैनर के साथ ही सैनिटाइजर व मास्क की भी व्यवस्था है। थाने में आने वाले पुलिसकर्मियों के साथ ही फरियादियों को भी इस डेस्क पर रोककर उनकी थर्मल स्कैनिंग की जा रही है।
साथ ही उन्हें सैनिटाइजर भी दिया जा रहा है। सीओ लाइन एएसपी केवी अशोक ने बताया कि प्रत्येक थानों में हेल्प डेस्क स्थापित कराने के साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बिना थर्मल स्कैनिंग के कोई भी परिसर में प्रवेश न कर सके। यह व्यवस्था पुलिसकर्मियों के साथ ही फरियादियों को भी संक्रमण से बचाने में मददगार होगी।
दो तरह से होगा फायदा
पुलिस अफसरों का कहना है कि हेल्प डेस्क के स्थापित होने से दो तरह से बचाव हो सकेगा। पहला तो पुलिसकर्मियों के संक्रमित होने की दशा में फौरन ही जांच होने पर तुरंत उनका इलाज शुरू किया जा सकेगा और इससे दूसरे जवान भी संक्रमित होने से बच सकेंगे। दूसरा यह कि फरियादियों की जांच होने से थर्मल स्कैनिंग के जरिए आम लोगों में भी संक्रमण का पता लगाया जा सकेगा। दरअसल अब भी बहुत से लोग जांच कराने के लिए आगे नहीं आ रहे। ऐसे में थानों पर जांच के दौरान व्यक्ति के संक्रमित मिलने पर उसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी जाएगी।