फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prayagraj News : डायलिसिस सरकारी, इलाज प्राइवेट अस्पताल में, दर-दर भटक रहे मरीज

Sat, 06 Sep 2025 05:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली) और मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) में मरीजों को निशुल्क डायलिसिस की सुविधा तो मिल रही है पर इलाज के लिए उन्हें भटकना पड़ता है।
विज्ञापन
डायलिसिस - फोटो : Adobe stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली) और मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) में मरीजों को निशुल्क डायलिसिस की सुविधा तो मिल रही है पर इलाज के लिए उन्हें भटकना पड़ता है। स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय पर आधा दर्जन जिलों के मरीजों का दबाव है, वहीं निजी चिकित्सालय में मरीजों की जेब खाली हो जाती है। ऐसे में सामान्य मरीज के लिए किडनी का उपचार कराना मुश्किल हो रहा है।

विज्ञापन


एसआरएन अस्पताल में प्रयागराज के अलावा कई अन्य जिलों के मरीज भी उपचार कराने आते हैं। इसकी वजह से यहां मरीजों का काफी दबाव रहता है। इसके अलावा यहां डायलिसिस के लिए सिर्फ 11 बेड हैं।

इसे देखते हुए कॉल्विन व बेली अस्पताल में पीपीपी मोड पर डायलिसिस की सुविधा शुरू की गई है। हालांकि यहां किडनी रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने की वजह से मरीजों को निजी चिकित्सालयों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में डायलिसिस को छोड़कर फिस्टुला लगवाने, दवाई व चिकित्सकीय परामर्श सहित अन्य तरह के उपचार के लिए उन्हें कीमत चुकानी पड़ती है।

विज्ञापन

महीने में 20 से 25 हजार का होता है खर्च

मरीज की स्थिति के अनुसार उसकी किडनी का उपचार होता है। डायलिसिस हफ्ते में दो से तीन बार होती है। इसके लिए मरीज को फिस्टुला बनवाने में ही करीब 10 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं हर हफ्ते करीब पांच हजार की दवाएं लेने के साथ डॉक्टर की फीस में भी अच्छा खासा खर्च होता है। एसआरएन अस्पताल में फिस्टुला के लिए करीब पांच हजार रुपये खर्च होते हैं और दवाएं बाहर से ही लेनी पड़ती हैं। डायलिसिस के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है।

नहीं हो सकी किडनी रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति

छावनी सामान्य अस्पताल की तरफ से बेली और कॉल्विन अस्पताल में सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक मुहैया कराने का प्रस्ताव अपर निदेशक को इसी साल भेजा गया था। इसमें किडनी रोग विशेषज्ञ भी शामिल थे। दोनों अस्पतालों में चिकित्सकों के बैठने की जगह तक चिह्नित हो गई थी लेकिन फाइल शासन के पास पहुंचने के बाद गुम हो गई।
विज्ञापन

यहां इतने बेड

एसआरएन में 11, बेली में 13 और कॉल्विन में 18 बेड डायलिसिस के लिए आरक्षित हैं। तीनों अस्पतालों में तीन शिफ्टों में निशुल्क डायलिसिस होती है। इसके अलावा कॉल्विन और बेली में मरीजों को डायलिसिस में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं भी निशुल्क मिल जाती हैं।

सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक का प्रस्ताव मिला था जिसे मेरी तरफ से शासन को भेज दिया गया था। इसके बाद क्या हुआ इसकी जानकारी नहीं है। मैं इस संबंध में जल्द ही बात करता हूं। - डॉ. राकेश शर्मा, अपर निदेशक स्वास्थ्य
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें