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प्रयागराज: 50 हजार के इनामी ने नैनी जेल में लगाई फांसी, आगरा का रहने वाला था मृतक

Wed, 25 Sep 2019 11:53 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prince agrawal file photo - फोटो : प्रयागराज
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नैनी (प्रयागराज)। केंद्रीय कारागार नैनी के हाई सिक्योरिटी सेल के बी ब्लाक में मंगलवार की रात करीब 12.30 बजे सजायाफ्ता बंदी प्रिंस अग्रवाल ने फांसी लगा ली। मामले का पता चलते ही जेल में हड़कंप मच गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे एसआरएन अस्पताल भेजा गया। भोर में उसे डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। घर वालों ने आरोप लगाया है कि प्रिंस को यातनाएं देकर मारा गया। 
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आगरा जनपद के में ताजगंज बसई कला का रहने वाला प्रिंस अग्रवाल उर्फ समर ज्ञानी राहुल (23) शातिर अपराधी था। उसे पिछले साल 12 सितंबर 2018 को आगरा से नैनी सेंट्रल जेल में दाखिल कराया गया था। प्रिंस 7 अक्तूबर 2018 को जेल प्रशासन को गच्चा देकर फरार हो गया था। 15 दिन पहले 10 सितंबर को एसटीएफ ने उसे रुद्रपुर, उत्तराखंड स्थित ससुराल से गिरफ्तार कर लिया था। 11 सितंबर को उसे दोबारा नैनी सेंट्रल जेल में लाया गया। उसे हाई सिक्योरिटी सेल के बी ब्लाक में रखा गया। था।

मंगलवार की रात उसने दरवाजे पर लगे लोहे के एंगल में लोअर के नाड़े से फांसी लगा ली। सुरक्षा ड्यूटी में तैनात सिपाही विद्याधर मिश्रा ने देखा तो अधिकारियों को सूचना दी। पता चलने पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक एचबी सिंह व अन्य लोग पहुंचे। आनन-फानन में फंदे से उतारकर जेल अस्पताल ले जाया गया। वहां से एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां चिकित्सकों ने प्रिंस को मृत घोषित कर दिया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक एचबी सिंह ने बताया कि उसके घरवालों को सूचना दे दी गई है। शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया। घटना के बाद प्रिंस की मामी सुखविंदर कौर ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रिंस को यातनाएं देकर मारा गया है। उन्होंने मामले की जांच की मांग की है। 
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- बंदी प्रिंस ने फांसी लगाई है। घटना की जांच की जा रही है। फिलहाल एक सिपाही को सुरक्षा ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर निलंबित कर दिया गया है। हरिबख्श सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक  

नैनी जेल

फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
जेल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, परिजनों ने लगाए आरोप 

प्रयागराज। नैनी जेल से हाई सिक्योरिटी सेल में बंदी प्रिंस अग्रवाल द्वारा फांसी लगाए जाने की घटना से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाई सिक्योरिटी बैरिक को इस तर्ज पर बनाया जाता है कि हर कैदी सुरक्षाकर्मियों के निगाहों के सामने रहे। इसके बाद भी प्रिंस ने फांसी लगा ली। जेल प्रशासन ने फिलहाल एक सिपाही विद्याधर मिश्रा को निलंबित कर दिया है लेकिन इस मामले में बड़े अधिकारियों के भी फंसने की पूरी संभावना है। 

हाई सिक्योरिटी बैरिक में देश के नामी अपराधियों के साथ आतंकियों को भी रखा गया है। इसलिए वहां सुरक्षा व्यवस्था बहुत कड़ी होती है। प्रिंस के घर वालों ने आरोप लगाया कि उसे टार्चर कर मारा गया है। उसकी मामी सुखविंदर कौर बताती हैं कि वह प्रिंस की पत्नी सिमरन को लेकर तीन दिन पहले से ही प्रयागराज में है। दो दिन पहले वह प्रिंस मिलने गई थी तो वह रो रहा था। उसने कहा था कि जेल अधिकारी उसे बहुत टार्चर कर रहे हैं। अगर उसे यहां न निकाला गया तो वह जिंदा नहीं रह सकता।

सुखविंदर और सिमरन ने उसे बहुत समझाया था कि उसे जल्द ही यहां से निकाला जाएगा। सुखविंदर ने बताया कि प्रिंस के पिता भी दो दिन से यहां हैं। मंगलवार को एक मामले में उसकी जमानत हुई थी। ऐसे में वह रात में क्यों फांसी लगाएगा। मामले की जांच की जाय। प्रिंस का कस्टोडियल मर्डर किया गया है। जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर जेल के अधिकारी अलग ही बयान दे रहे हैँ। वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरिबख्श सिंह का कहना है कि घटना की मजिस्ट्रेटी जांच होगी। दो दिन पहले प्रिंस की मौसिया सास एवं पत्नी सिमरन मिलने आई थीं। उनसे मुलाकात करने के बाद से वह डिप्रेशन में था। उसने बताया था कि उसकी मौसिया सास चाहती है कि वह अपनी पत्नी को छोड़ दे। बाकी जांच के बाद तय होगा। हालांकि वरिष्ठ जेल अधीक्षक की बात से प्रिंस की मामी ने इनकार किया है। उनका कहना है कि अपने गुनाहों से ध्यान हटाने के लिए पुलिस कहानी बना रही है। प्रिंस का सिमरन का बहुत अच्छा संबंध था। वह तीन दिन से प्रिंस की जमानत के लिए प्रयागराज में है। 

नैनी सेंट्रल जेल

नैनी जेल में छापेमारी के बाद बाहर आते अधिकारी और कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
सिमरन से किया था प्रेम विवाह 
प्रयागराज। फेसबुक के जरिए हुई मित्रता के बाद उत्तराखंड की सिमरन से प्रेम विवाह किया था। जेल से भागने के बाद वह रुद्रपुर में सिमरन कौर के साथ किराए के कमरे में रहता था और एक कंपनी में नौकरी भी करता था, लेकिन इस बीच उसने नया गैंग बनाकर चोरी की दो घटनाएं उत्तराखंड में कर डाली थी। उसने जब फांसी लगाई थी उसके पास एक कागज का टुकड़ा मिला था, जिसमें एक मोबाइल नंबर लिखा था और आगे लिखा था कि ये मेरे घर का नंबर है। 

मंगलवार को मिली थी एक मुकदमे में जमानत
नैनी। प्रिंस अग्रवाल की 24 सितंबर को उसकी प्रयागराज के एक मुकदमे में तारीख थी। उसी में उसका ससुर आया था, जिसमें उसे जमानत मिल गई थी। 25 सितंबर को उसे पुलिस अभिरक्षा में उत्तराखंड ले जाना था। वहां भी उसने नैनी से भागने के बाद चोरी की घटना की थी। उसी मुकदमे में उसकी 25 सितंबर को पेशी थी। इसी वजह से उसका ससुर सतीश चौधरी प्रयागराज के एक होटल में रुका था। 

जेल
पत्नी के हाथ की मुहर अपने हाथ में उतारकर नैनी सेंट्रल जेल से भागा था प्रिंस

नैनी। केंद्रीय कारागार नैनी से 07 अक्टूबर 2018 को फरारी के लिए सजायाफ्ता बंदी प्रिंस अग्रवाल ने पूरे शातिराना अंदाज का परिचय दिया था। हालांकि उसकी शातिराना चाल पर उसकी शौक भारी पड़ गई, जिसकी वजह से वह दोबारा सलाखों के पीछे पहुंच था। प्रिंस जेल से भागने से पहले मिलाई करने आई अपनी पत्नी सिमरन चौधरी के हाथ में लगी मोहर पर पानी छिड़क कर गिला किया और फिर उसे अपने हाथ में चिपका लिया। जिससे पत्नी के हाथ की मुहर उसके हाथ पर भी बन गई। उसी को दिखाकर वह जेल से बाहर चला गया था और किसी को उस पर तनिक भी शक नहीं हुआ। उसने बताया था कि उसके असली माता पिता का उसे नाम नहीं मालूम। उसे आगरा जनपद के ताजगंज अतंर्गत बसईकला गांव के अनिल अग्रवाल ने पाल पोस कर पुलिस रिकार्ड के मुताबिक उसे आगरा जनपद में दर्ज सात मुकदमों में सजा हो चुकी है। उस पर आठ मुकदमें अभी भी विचाराधीन हैं। जिसमें पांच आगरा के दो प्रयागराज के और एक लखनऊ का मुकदमा है। 

जेल में महिला - फोटो : demo pics
इंटर तक पढ़ा प्रिंस दो बार पहले पुलिस अभिरक्षा से हो चुका है फरार
नैनी (ब्यूरो)। नैनी सेंट्रल जेल से फरारी के बाद भी प्रिंस ने अपराध करना नहीं छोड़ा था। बचपन से ही बिगड़ी उसकी संगत का असर अब भी है। वह अपनी ससुराल उधम सिंह नगर में नाम बदलकर रहता था, लेकिन चोरी छिनैती करता रहता था। उसने पुलिस को सभी घटनाओं का डिटेल भी बताया है, जहां से उसने चोरी की थी। 50 हजार के ईनामियां घोषित किए गए प्रिंस अग्रवाल इंटर तक पढ़ा है। पहले वो छोटी मोटी चोरियां करता था लेकिन आगरा के रहने वाले मोनू के संपर्क के आने के बाद वह जयपुर, राजस्थान, आगरा समेत अन्य शहरों में भी चोरियां करने लगा था। गिरफ्तारी के बाद वह 29 महीने आगरा की जेल में और बाद में गाजीपुर के बाल संरक्षणगृह में रहा है। इससे पहले वह गाजीपुर व आगरा से पुलिस अभिरक्षा से फरार हो चुका है। जून से अगस्त तक वह रुद्रपुर  में एक फैक्ट्री में नौकरी कर रहा था। पत्नी के साथ वह वहीं किराए पर रहता था।  
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Jail
मजिस्ट्रेटी पंचनामा में देरी की वजह से नहीं हो पाया पोस्टमार्टम
नैनी। कागजी लिखा पढ़ी और मजिस्ट्रेटीऱ् पंचनामा होने में देर होने की वजह से बुधवार को प्रिंस के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। बुधवार को देर शाम उसका मजिस्ट्रेटी पंचनामा भरा गया। गुरूवार को तीन डाक्टरों का पैनल वीडियोग्राफी के मध्य उसके शव का पोस्टमार्टम करेगा। उसके बाद उसका ससुर सतीश चौधरी उसके शव को लेकर उत्तराखंड जाएगा। 
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