आरओ और धुलाई सेंटरों पर नियंत्रण नहीं
शहर क्षेत्र में पेयजल के संकट का एक कारण यह भी है कि निजी अस्पताल, वाणिज्यिक-औद्योगिक इकाइयां भूजल का दोहन कर रही हैं। गाड़ियों की धुलाई करने वाले सेंटर और आरओ प्लांट में हजारों लीटर पानी रोजाना बर्बाद हो रहा हैं। नगर निगम जलकल विभाग की ओर से निगरानी का कोई इंतजाम नहीं हैं। इससे भूजल स्तर लगातार गिर रहा हैं। जानकारों की मानें तो पिछले पांच वर्ष में 40 फुट तक पानी नीचे खिसक गया हैं। इसका बड़ा कारण पानी की बर्बादी और तालाबों का वजूद समाप्त होना है। यह समस्या जुलाई के प्रथम सप्ताह तक रहेगी। इसके बाद भूगर्भ जल रिचार्ज होगा तब जाकर पानी का स्तर सामान्य होगा।
पानी की समस्या झूंसी, नैनी, झलवा में अधिक हैं। यहां अब भी हैंडपंप पर ही लोग आश्रित हैं। ऐसे इलाकों के लिए नई परियोजनाएं तैयार की गई हैं। जहां तक अन्य क्षेत्रों की बात है तो 125 नलकूप और पंप रिबोर किए गए हैं। चार पंप खराब पड़े हैं, जिसमें तीन पर काम शुरू करा दिया गया हैं। दस आरओ और धुलाई सेंटरों को बंद कराया गया हैं। - कुमार गौरव, जीएम जलकल।