जानकार बताते हैं कि बसपा की दयनीय दशा के लिए स्थानीय गुटबाजी भी जिम्मेदार है। चुनाव से ठीक पहले टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी में दो फाड़ हो गया। दोनों गुटों में मारपीट भी हुई। उस वक्त जिलाध्यक्ष रहे टीएन जैसल ने दूसरे गुट पर टिकट बंटवारे में मनमानी का आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। मारपीट में चोटिल हुए अतुल कुमार टीटू को उनकी जगह जिलाध्यक्ष घोषित कर दिया गया।
इसके बाद टीएन जैसल के समर्थन में करछना विधानसभा समिति के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। इस घटना के बाद पार्टी के कैडर कार्यकर्ताओं में से एक गुट ने अपने हाथ खींच लिए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसी गुटबाजी के कारण कैडर वोटर कम संख्या में मतदान करने पहुंचे। इसका नतीजा सामने है।
बसपा के वोट बढ़े, मत प्रतिशत घटा
2017 के मेयर चुनाव के मुकाबले इस बार बसपा को मिले मतों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन मत प्रतिशत घट गया है। पिछले चुनाव में बसपा को 7.66 फीसदी मत मिले थे, जबकि इस चुनाव में 7.44 फीसदी मत प्राप्त हुए। वहीं, वोटों की संख्या बढ़ी है। पिछले चुनाव में बसपा प्रत्याशी को 24,969 मत मिले थे। इस बार यह आंकड़ा 36,799 तक पहुंच गया। यानी, पार्टी के खाते में 12,830 मत अतिरिक्त आए।
हालांकि, इस बार मतदान भी पहले के मुकाबले करीब एक फीसदी ज्यादा हुआ था। पिछले चुनाव में कुल 3 लाख 25 हजार 811 मत पड़े थे, जबकि इस बार 4 लाख 94 हजार 456 मत पड़े हैं। यानी, एक लाख 68 हजार 245 मत अधिक। बसपा को अतिरिक्त पड़े मतों में 7.62 फीसदी शेयर पाया है।
पार्षदी में भी एक सीट का हुआ नुकसान
बसपा को पार्षद चुनाव में भी एक सीट का नुकसान हुआ है। पिछले चुनाव में तीन पार्षद जीते थे। इस बार पार्टी को सिर्फ दो सीटें ही हासिल हुईं। उसे वार्ड 36 मधवापुर और वार्ड 91 पूरापड़ाइन से जीत मिली है। 100 वार्डों के नगर निगम होने के बावजूद पार्टी बमुश्किल आधी सीटों पर ही चुनाव लड़ पाई थी। अन्य सीटों पर उसे प्रत्याशी ही नहीं मिले थे।