संगम तट पर महाकुंभ की तैयारियों के बीच आरएसएस अपने शताब्दी वर्ष के कई युग परिवर्तक एजेंडे का एलान कर सकता है। तीन साल बाद महाकुंभ लगने के साथ ही आरएसएस की स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में प्रयागराज के गौहनियां में आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शताब्दी वर्ष की व्यापक कार्ययोजना को मूर्त रूप देने की तैयारी है। इस महामंथन में 2024 की भी दिशा तय होगी और विजन -2025 का खाका भी।
गौहनियां में सर संघ चालक मोहन भागवत की मौजूदगी में शीर्ष पदाधिकारी शताब्दी वर्ष की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। इसमें हिंदुत्व की ताकत बढ़ाने के साथ ही राष्ट्र रक्षा और समृद्धि का व्यापक एजेंडा तैयार करने की योजना है। कहा जा रहा है कि महाकुंभ से ही इस एजेंडे को आगे बढ़ाने की शुरुआत होगी। संगठन के विस्तार के लिए भी इसे सबसे अनुकूल समय माना जा रहा है। ऐसे में अगले तीन साल तक विशेष जन जागरण अभियान चलाने की भी रणनीति बनाई जाएगी।
संघ को देश भर से मिले फीडबैक से पता चला है कि जातियों के मकड़जाल में उलझा समाज उसके विस्तार में आड़े आ रहा है। इसको लेकर झारखंड, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे कुछ राज्यों में कराए गए सर्वेक्षणों को भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में रखा जाएगा। इसमें चिंतन का यह विषय अहम होगा कि किस तरह जाति-पात की दीवारें संघ के विस्तार में बाधक बनी हुई हैं। इसके लिए संघ की ओर से एक बड़ा एजेंडा प्रस्तुत किया जाएगा। विजन-2025 को लेकर बिंदुवार कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसे भागवत के सामने रखा जाएगा।
इस विजन को स्वीकार करते हुए संगठन का विस्तार करने के साथ ही एक भारत-श्रेष्ठ भारत की दीर्घकालिक योजना पर काम शुरू होगा। इसमें अयोध्या, काशी के बाद मथुरा के एजेंडे पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी। मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराना आरएसएस के अहम एजेंडे में से एक है। इसके लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया जा सकता है।