prayagraj news : माघ मेला शुरू होने से पहले काला पड़ा गंगाजल।
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रामघाट, दशाश्वमेघ घाट के घाटियों और तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक पिछले साल नवंबर के महीने में गंगा जल दूधिया और साफ था। 15 दिन से स्थिति खराब हुई है। गंगा जल का रंग बदलकर काला हो गया है। फाफामऊ, रसूलाबाद, सलोरी, दारागंज, नैनी और झूंसी में गंगा के किनारों पर जाने से पता चला कि गंगा जल का रंग बदलने का मुख्य कारण नदी में गिराए जा रहे गंदे नालों और एसटीपी का पानी है।
prayagraj news : माघ मेले से पहले काला पड़ा गंगा और यमुना का जल।
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स्थानीय लोगों ने मौके पर दिखाया कि दारागंज के नागवासुकि छोर पर बांध रोड के बगल गंदे काले रंग की अलग धार गंगा के बराबर बह रही है। एक तरफ मुख्य धारा गंगा की है तो दूसरी तरफ बेहद गंदा दुर्गंध वाला काला गंदा पानी बह रहा है। यही गंदा पानी गंगा को मैला कर उसका रंग बदल रहा है।
मेला क्षेत्र स्थित सिर्फ दारागंज की बात करें तो यहां पांच छोटे नालों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे गंगा में गिराया जा रहा है। यहीं अल्लापुर की ओर से आने वाले पंपिंग स्टेशन और सलोरी एसटीपी का पानी गंगा जल में प्रदूषण का कारण बन रहा है।
Prayagraj News: शहर के नाले गंगा और यमुना में मिल रहे हैं।
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बोले पुरोहित, दूधिया जल महीने भर में बदलकर हुआ काला
रामघाट पर दशकों से बैठ रहे पुरोहित और के मुताबिक पिछले नवंबर में गंगा जल का रंग दूधिया था। सूरज की रोशनी पड़ने पर जल चमकता था। बीच धार ही नहीं किनारों पर निर्मल गंगा की अविरल धारा थी। अब घाटों पर तो जल रंग बदल चुका है। श्रद्दालु भी इसकी शिकायत करते हैं, लेकिन आस्था में डुबकी जरूर लगाते हैं, डिब्बों में जल भी भरते हैं। पुरोहितों और घाटियों ने कहा कि कुंभ की तरह गंगा जल की धारा निर्मल होनी चाहिए।
prayagraj news : शहर के नाले गंगा और यमुना में मिल रहे हैं।
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