संगम तट स्थित प्रसिद्ध श्री बड़े हनुमान जी मंदिर में 14 दिनों के लंबे जलशयन के बाद शनिवार को प्रभु के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण संकटमोचन जलमग्न होकर विश्राम मुद्रा में थे। मां गंगा के वापस लौटने के बाद मठ-मंदिर परिसर शंखनाद और घंटा-घड़ियाल की गूंज से जीवंत हो उठा।
बाघंबरी पीठ के महंत बलबीर गिरि जी महाराज की मौजूदगी में गंगा स्नान के बाद प्रभु का पंचामृत से भव्य अभिषेक और आकर्षक शृंगार किया गया। शाम पांच बजे महाआरती के साथ ही भक्तों ने जयकारों के बीच अपने आराध्य के दर्शन किए। मान्यता है कि मां गंगा द्वारा लेटे हनुमान जी का पाद प्रक्षालन करने के बाद प्रयागराज में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।