पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की पेशवाई मंगलवार की सुबह रथों, बग्घियों, हाथी-घोड़ों के साथ शाही अंदाज में निकली। इस पेशवाई में सौ से अधिक महामंडेश्वर रथों पर सवार होकर निकले। भस्म-भभूत पोते साधु-संतों का कारवां निहारने के लिए सड़कों पर भीड़ उमड़ी। नागाओं, संन्यासियों, बैरागियों के जत्थे आकर्षण का केंद्र बने रहे।
जमात बाग से दही -मीठा का भोग लगने के बाद पेशवाई सुबह नौ बजे शुरू हुई। परंपरागत तरीके से शाही अंदाज में हजारों की तादाद में साधु-संत निकले। ध्वजा, पताका, घोड़ा, हाथी, ऊंट के अलावा तरह-तरह के प्राचीन अस्त्र-शस्त्र को लेकर नागा संत भी पेशवाई में शामिल हुए। उनके साथ अखाड़े के महामंडलेश्वर, संत-महंतों की सवारियां चल रही थी। इस पेशवाई में कई विदेशी बाबा भी रथों-बग्घियों की शोभा बने। अखाड़े के संतों के कई विदेशी शिष्य पेशवाई में शामिल हुए।
शाही पेशवाई जमात बाग से बक्ख्शी बांध पुलिस चौकी, बख्शी त्रिमुहानी, बड़ी कोठी से दारागंज स्थित धकाधक चौराहा, महानिर्वाणी अखाड़े से होते हुए भगवान बेनी माधव मंदिर के पास से निराला मार्ग, मोरी होते हुए त्रिवेणी रोड से मेला क्षेत्र में प्रवेश किया।