मऊआइमा में हुई सनसनीखेज वारदात के बाद बैंक से लेकर एसआरएन अस्पताल तक कोहराम मचा रहा। मैनेजर अनिल कुमार दोहरे गोली लगने के बाद बैंक पहुंचे तो उन्हें लहुलुहान हालत में देख सहकर्मियों के होश उड़ गए। आननफानन में उन्हें कार में लादकर एसआरएन लाया गया लेकिन कुछ देर बाद ही उनकी मौत हो गई। साथी की मौत पर जहां बैंककर्मी स्तब्ध थे, वहीं परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल था।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में नीरज ने बताया कि अनिल गाड़ी चला रहे थे जबकि वह उनके बगल की सीट पर बैठा हुआ था। पीछे की सीट पर उसने अपना बैग रख दिया था जैसा कि वह अमूमन करता है। उसने यह भी बताया कि वह मरखामऊ असरहा के पास बांका जलालपुर प्राइमरी स्कूल के पास पहुंचे थे कि तभी बाइक पर तीन युवक खड़े दिखे। गाड़ी उन्हें पार कर कुछ दूर बढ़ी ही थी कि तभी पीछे से तीनों युवक बाइक पर सवार होकर आए और कुछ आगे जाने पर ओवरटेक कर कार रुकवा ली। बाइक से उतरे युवक के हाथ में असलहा देख उनके होश उड़ गए। हालांकि अगले ही पल उसने गोली दाग दी।
पुलिस के मुताबिक, नीरज ने बताया कि गोली चलने की आवाज सुनकर एक पल के लिए उसकी आंखें बंद हुईं। अगले पल जैसे ही उसने आंखें खोली, ड्राइवर सीट पर बैठे अनिल लहुलुहान हालत में पड़े थे। इस पर वह दहशत में आ गया। इसी दौरान बदमाश पीछे आया और असलहे की बट से ही वार कर शीशा तोड़कर सीट पर रख बैग निकाल लिया। हालांकि तभी घायल होने के बावजूद हिम्मत दिखाते हुए अनिल ने गाड़ी भगा ली और फिर सीधे बैंक जाकर रुके। नीरज ने शोर मचाया तो कर्मचारी बाहर आए। तब तक अनिल का काफी खून बह चुका था। उन्हें इस हालत में देख साथी कर्मचारी स्तब्ध रह गए। नीरज के साथ ही आरिफ नाम के कर्मचारी ने अनिल को संभाला और फिर कार से ही लेकर अस्पताल जाने लगे। तब तक एसआई गौरव सिंह पहुंच गए और रास्ते से ही अनिल को लेकर सीएचसी पहुंचे। हालांकि हालत गंभीर देखते हुए उन्हें एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिसके बाद कार से ही उन्हें लेकर साथी व पुलिस एसआरएन पहुंची। लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।