प्रयागराज के कई मुहल्लों में भरा बाढ़ का पानी।
- फोटो : अमर उजाला।
जलस्तर के साथ बढ़ रहा बाढ़ का दायरा
दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी है। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार शाम को यमुना का जलस्तर दो सेमी प्रतिघंटे और गंगा का करीब डेढ़ सेमी प्रतिघंटे की दर से बढ़ा। ऐसे में बाढ़ का दायरा भी फैलता जा रहा है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहने के आसार हैं और जलस्तर 84 मीटर तक पहुंचने की बात भी कही जा रही है। हालांकि सिंचाई विभाग के अफसरों के अनुसार रविवार शाम से राहत की उम्मीद है। केन, बेतवा, चंबल और पहाड़ों से जो पानी छोड़ा गया है उसे देखते हुए रविवार को भी जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रहेगी लेकिन अब फिर से पानी नहीं छोड़ा गया और मौसम साफ रहा तो रविवार शाम से जलस्तर में कमी आने की उम्मीद है।
प्रयागराज के कई मुहल्लों में बाढ़ का पानी भरने से नाव चल रही है।
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बाइक पर ले गए चारपाई, बाढ़ के पानी में तैराकर हटाई चौकी
शनिवार को बाढ़ प्रभावित इलाके में अजीबो गरीब नजारे देखने को मिले। कई घरों में बाढ़ के पानी पर सामान तैर रहा था। इसे बचाने की जद्दोजहद में कुछ लोग मोटरसाइकिल पर ही चारपाई लादकर बाहर ले आए। चौकी तो बाढ़ के पानी के सहारे ही बाहर लेकर आए। खुद को और सामान बचाने की इस तरह की जद्दोजहद देर तक देखने को मिली।
गंगा एवं यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब पौने दो मीटर नीचे है लेकिन छोटा बघाड़ा के बाढ़ की विभिषिका अभी से दिखने लगी है। सैकड़ों परिवार तो अपना घर होने के बावजूद कहीं और आसरा तलाशने के लिए मजबूर हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने अपना सामान पहले तल पर शिफ्ट कर दिया है। वहीं कई परिवार ऑटो-रिक्शा से अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले गए।
प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
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छोटा बघाड़ा में सैकड़ों घर पानी से घिरे
छोटा बघाड़ा के शिवालय के पास तक पानी आ गया है। अभिषेक यादव, राजा रघुवंशी समेत सैकड़ों घर बाढ़ में घिर गए हैं। राजा रघुवंशी के बेसमेंट में पानी भर गया है। उनके दरवाजे पर भी लग गया है। उनका कहना है कि बेसमेंट और भूतल के सामान प्रथम तल लेते गए हैं। जो सामान नहीं ले जा सकते थे वह खराब हो रहे हैं। अभिषेक यादव का कहना है कि अभी उनके घर में पानी नहीं घुसा है लेकिन सामान प्रथम तल पर कर दिया है। छोटा बघाड़ा के रामदुलार के घर भी बाढ़ के पानी में घिर गया है। अभी घर में पानी नहीं घुसा है लेकिन उन्होंने शनिवार को उन्होंने सामान शिफ्ट कर दिया। हालांकि, कई सामान वह नहीं ले जा पाए और उनके खराब होने की आशंका बन गई है। वहीं रोहित बरनवाल के घर में भी पानी घुस गया है। रोहित का कहना है कि ज्यादातर सामान प्रथम तल पर शिफ्ट कर दिया है लेकिन भारी सामान नीचे ही रह गए हैं। उनका कहना है कि बाढ़ आने पर हर बार आलमारी आदि सड़ जाते हैं और नए सिरे से बनवाना पड़ता है।
प्रयागराज में तेजी से बढ़ रहा गंगा और यमुना का जलस्तर।
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बाढ़ राहत शिविर भी हुए शुरू, पहुंचने लगे पीड़ित
गंगा-यमुना का पानी बस्तियों में पहुंचने के साथ बाढ़ राहत शिविर भी शुरू हो गए हैं। शनिवार को कैंटोनमेंट स्थित गेस्ट हाउस में कुल 14 लोग और छोटा बघाड़ा में एनी बेसेंट स्कूल में कुल 36 लोग पहुंच गए। इसके साथ ही बाढ़ पीड़ितों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। छावनी गेस्ट हाउस राहत शिविर में आधा दर्जन परिवार पहुंच गए हैं। ज्यादातर परिवार अपना सामान लेकर पहुंचे हैं। एनी बेसेंट स्कूल में दिन में एक बजे तक ही आधा दर्जन से अधिक परिवार पहुंच गए थे।
पानमति सुबह ही पूरे सामान और परिवार के साथ पहुंच गईं। एनी बेसेंट में सीमा केसरवानी, कृष्णा देवी, सुनील कुमार सैनी, सुरेश यादव, काजल रावत, नीरज कुमार समेत अनेक लोग अपने परिवार और सामान के साथ राहत शिविर में पहुंच गए। राहत शिविर में आने वालों का क्रम रात तक जारी रहा।
प्रयागराज में तेजी से बढ़ रहा गंगा और यमुना का जलस्तर।
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किरायेदारों को पहले रोका गया
एनी बेसेंट स्कूल में किराये पर रहने वाले बाढ़ पीड़ितों को जगह नहीं दी जा रही थी। नीरज कुमार अपनी बहन और भांजे के साथ शिविर में पहुंचे लेकिन काफी देर तक उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। शिविर में प्रवेश से पहले सभी का आधार कार्ड देखा जा रहा था। जिनका आधार कार्ड दूसरी जगह का था उन्हें भी रोका जा रहा था। हालांकि, बाद में नीरज को शिविर में रहने की मंजूरी दे दी गई।
सुबह नहीं मिला नाश्ता व भोजन
बाढ़ राहत शिविर में पीड़ितों को शनिवार की सुबह नाश्ता और भोजन नहीं मिला। हालांकि दिन में बिस्तर, पानी का टैंकर, मोबाइल टॉयलेट आदि जरूरी सुविधाओं का इंतजाम कर लिया गया था। अमीन भानु प्रताप सिंह का कहना था कि अभी लोग आए हैं। शाम से भोजन आदि उपलब्ध कराया जाएगा।
फूलपुर में चलाई गईं नावें
फूलपुर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को राहत पहुंचाने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। शनिवार को तहसील के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नौ नावें चलाई गईं। इससे लोगों को काफी सहूलियत मिली।