वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व सांसद रामनिहोर राकेश नहीं रहे। बुधवार की सुबह हृदयगति रुकने से उनका निधन हो गया। कूपर रोड स्थित आवास पर ही उन्होंने अंतिम सांस ली। बेटे रितेश के मुताबिक सुबह तकरीबन आठ बजे बाथरूम में चक्कर आने पर वह फिसल गए थे। आनन-फानन में उन्हें पार्क रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया लेकिन, वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वह 81 वर्ष के थे। वह अपने पीछे पत्नी लक्ष्मी प्रभा राकेश, चार बेटों, बहुओं से भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। बेटी अर्चना राकेेश का भदोही से बसपा विधायक रहने के दौरान निधन हो गया था।
तिरंगे में लपेटकर उनका शव कूपर रोड स्थित आवास से रसूलाबाद घाट ले जाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ देर शाम उनकी अंत्येष्टि की गई। मुखाग्नि सबसे छोटे बेटे रितेश राकेश ने दी। घाट पर पुलिस की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
निधन की खबर सुनकर उनके समाज और राजनीति से जुड़े लोगों का उनके आवास पर जुटना आरंभ हो गया था। घर और घाट पर उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों में न्यायमूर्ति सभाजीत यादव, पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामपूजन पटेल, शेखर बहुगुणा, अनुग्रह नारायण सिंह, पूर्व सांसद शैलेन्द्र कुमार, योगेश शुक्ला, अभय अवस्थी, विजय प्रकाश, अशोक वाजपेयी, हर्ष वाजपेयी, विजय मिश्रा, जिलाध्यक्ष अनिल द्विवेदी, चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह, प्रदेश प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय, फुजैल हाशमी, शमीम आलम, संजय तिवारी, गिरीश पासी, निशांत त्रिपाठी, नफीस अनवर, अजय श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
तीन बार सांसद राकेश के राजनीतिक गुरु थे बहुगुणा
पूर्व सांसद रामनिहोर राकेश पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। जंघई में जन्मे राकेश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलएम तक की शिक्षा हासिल की थी। उन्होंने मनौरी एयरफोर्स में नौकरी भी की लेकिन बाद में नौकरी छोड़कर कचहरी में वकालत शुरू कर दी। कौशाम्बी तत्कालीन चायल लोकसभा से वह 1977 से 80, 1980 से 84 तथा 1989 से 1991 तक तीन बार सांसद चुने गए थे। वह 1980-84 के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम रसायन उर्वरक मंत्रालय के तहत आयल सलेक्शन बोर्ड के सदस्य भी रहे।
सोनिया गांधी ने जताया शोक
यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने रामनिहोर राकेश के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने उनकी पत्नी लक्ष्मी प्रभा राकेश ‘विमला’ और बड़े बेटे राजेश को फोन करके संवेदना व्यक्त की। प्रदेश प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय के मुताबिक सोनिया ने राकेश को दलितों का लोकप्रिय और प्रभावी नेता बताया। उत्तराखंड के पार्टी प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने राकेश के निधन को पार्टी की अपूरणीय क्षति बताया।