एसएसपी अभिषेक दीक्षित पर कार्रवाई की मुख्य वजह भले ही भ्रष्टाचार बताई जा रही हो। लेकिन, माना जा रहा है कि तीन दिन पहले हुआ बेरोजगारों का प्रदर्शन भी शासन की नाराजगी का एक बड़ी वजह है।
इस दिन हजारों छात्रों के हुजूम ने कर्नलगंज जार्जटाउन के तमाम इलाकों में घूम-घूम कर थाली, चम्मच पीटकर बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन किया था। पूर्व जानकारी के बावजूद पुलिस अफसर प्रदर्शनकारियों को रोकने में नाकाम रहे थे। इस दौरान कोविड-19 निर्देशों का भी जमकर उल्लंघन हुआ था।
पांच सितंबर को शहर में बेरोजगारी के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुआ था। कर्नलगंज जॉर्जटाउन और शिवकुटी में रहने वाले हजारों छात्रों ने सड़क पर उतर कर थाली और चम्मच बजाकर बेरोजगारी के खिलाफ आवाज बुलंद की थी।
शहर के अलग-अलग इलाकों से निकलकर बेरोजगार युवा पहले बालसन चौराहे पर एकजुट हुए थे और उसके बाद माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड, परीक्षा नियामक प्राधिकारी समेत अन्य जगहों पर पहुंचकर विरोध -प्रदर्शन किया था।
जुलूस की शक्ल में प्रदर्शनकारी करीब तीन घंटे तक सलोरी, बघाड़ा, बालसन, कटरा, जॉर्ज टाउन, टैगोर टाउन, बैंक रोड पर थाली और चम्मच लेकर घूमते रहे थे। खास बात है कि इस प्रदर्शन की जानकारी पुलिस प्रशासन को पहले से थी। दरअसल इस अभियान को सफल बनाने के लिए कई दिन पहले ही तैयारी शुरू कर दी गई थी।
जिसके तहत सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर पर रोजाना मैसेज पोस्ट कर युवाओं से बड़ी संख्या में इस अभियान में शामिल होने की अपील की जा रही थी। इन मैसेजेस को दर्जनों व्हाट्सएप ग्रुप और फेसबुक पेज पर शेयर किया जा रहा था।
इसके बावजूद पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने में नाकाम रही। हजारों युवाओं का हुजूम ना सिर्फ सड़क पर उतरा, बल्कि जुलूस निकालकर धारा -144 के उल्लंघन के साथ ही कोविड-19 से बचाव संबंधी दिशा-निर्देशों की धज्जी उड़ाई। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में स्थानीय खुफिया एजेंसी भी पूरी तरह से असफल रही।
दरअसल अफसरों के साथ ही खुफिया एजेंसी भी इस बात का अंदाजा लगाने में नाकाम रही कि इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का हुजूम सड़कों पर उतर सकता है। कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार वह अन्य अनियमितताओं के साथ ही एसएसपी अभिषेक दीक्षित पर कार्रवाई की एक मुख्य वजह युवाओं का यह प्रदर्शन रहा। जिसने ना सिर्फ सरकार को असहज स्थिति में डाला, बल्कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से कोरोना संक्रमण के फैलने का भी खतरा उत्पन्न किया।
25 युवाओं पर हुई थी एफ आईआर
प्रदर्शनकारियों को रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहने के बाद पुलिस ने अपनी नाक बचाने के लिए 25 युवाओं पर एफ आई आर दर्ज की थी। जार्जटाउन थाने में दर्ज इस केस में आरोप लगाया गया था कि युवा मंच के बैनर तले जुटे 25 युवाओं ने न सिर्फ कोविड-19 संबंधी दिशा-निर्देशों, बल्कि धारा -144 का भी उल्लंघन किया। जिसके बाद उन पर धारा 144 के उल्लंघन के साथ ही महामारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि यह कार्रवाई नाकाफी साबित हुई