आपटरेटरों की हड़ताल से बिजली विभाग के कैश काउंटर ठप पड़ गए हैं। काम प्रभावित होने के बाद महकमे के एसडीओ-जेई और लिपिकों को काउंटर संभालना पड़ रहा है। इससे सरचार्ज समाधान योजना के तहत पंजीकृत उपभोक्ताओं से वसूली के साथ ही बकायेदारों के खिलाफ अभियान लड़खड़ा गया है। सरचार्ज समाधान योजना के तहत पंजीयन कराने वाले करीब 42 हजार उपभोक्ताओं से 108 करोड़ रुपये की वसूली 31 मार्च तक होनी है। हड़ताल की वजह से इस योजना पर पानी फिरने की आशंका बढ़ गई है।
कैश काउंटर का ठेका लेने वाली इस्टरलिन कंपनी की ओर से शहर के डिवीजनों में तैनात आपरेटरों का पिछले सात माह से मानदेय का भुगतान नहीं हो सका है। सितंबर महीने से अब तक मानदेय न मिलने और कंपनी की ओर से कोई सार्थक जवाब न मिलने की वजह से आपरेटर हड़ताल पर चले गए हैं। तमाम मान मनौव्वल के बाद भी आपरेटरों के काम पर वापस न आने की वजह से कैश काउंटरों पर काम ठप पड़ गया है।
मार्च के आखिरी हफ्ते में जब करोड़ों रुपये के बकाया बिलों की वसूली के साथ ओटीए स्कीम के तहत पंजीकृत उपभोक्ताओं से ब्याज माफी के साथ बकाया जमा कराने के लिए यूपीपीसीएल ने एडी-चोटी एक कर दिया है, तब आपरेटरों के काम बंद करने से बिजली महकमे के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है। कहा जा रहा है कि इस्टरलिन कंपनी ने पैसा न होने की वजह से आपरेटरों के मानदेय का भुगतान करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
म्योहाल डिवीजन के एक्सईएन ओपी मिश्रा ने बताया कि तमाम कोशिशों के बाद आपरेटर काम पर आने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में कैश काउंटर खोलने के लिए एसडीओ, जेई के अलावा लिपिकों को लगाना पड़ रहा है, ताकि किसी तरह काम आगे बढ़ाया जा सके। इसी तरह कल्याणी देवी, रामबाग, नैनी, टैगोर टाउन और करैलाबाग डिवीजनों में कैश काउंटर ठप पड़ गए हैं। अभियंताओं का कहना है कि यही हाल रहा तो कर्मियों की कमी के चलते अभियान पर पानी फिरने से इंकार नहीं किया जा सकता।
ओटीएस स्कीम के तहत बिना ब्याज के बकाया बिज जमा कराने के लिए जोन में 45 हजार उपभोक्ताओं का पंजीयन सोमवार की शाम तक किया गया। इसके लिए रात नौ बजे तक डिवीजनों में दफ्तर खुले रहे। इन उपभोक्ताओं का पंजीयन बकाया बिल का 30 प्रतिशत जमा कराने के बाद किया गया है। मुख्य अभियंता वाणिज्य अंशराम वर्मा ने बताया कि 31 मार्च तक इन उपभोक्ताओं से 70 फीसदी बकाये का भुगतान हर हाल में जमा कराना है। इसके लिए चाहे जो इंतजाम करने होंगे, किए जाएंगे। अन्य अभियानों को रोक कर एसडीओ-जेई या अन्य कर्मियों को काउंटर पर लगाकर ओटीएस स्कीम का लक्ष्य पूरा कराया जाएगा।