जिला अदालत ने कौड़िहार ब्लॉक प्रमुख मोहम्मद मुजफ्फर की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायालय गैंगस्टर एक्ट सिद्धार्थ कुमार वागव ने दिया। आरोपी मोहम्मद मुजफ्फर के खिलाफ फूलपुर थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है।
जिला अदालत ने कौड़िहार ब्लॉक प्रमुख मोहम्मद मुजफ्फर की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायालय गैंगस्टर एक्ट सिद्धार्थ कुमार वागव ने दिया। आरोपी मोहम्मद मुजफ्फर के खिलाफ फूलपुर थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है।
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अभियोजन के अनुसार आरोपी मोहम्मद मुजफ्फर एक संगठित गिरोह का सरगना है, जो मवेशी तस्करी, उगाही, धोखाधड़ी और धमकी जैसे अपराधों में लिप्त है। यह गिरोह बिहार से पश्चिम बंगाल तक मवेशियों की तस्करी कर अवैध तरीके से वध कर मांस बेचता था और उससे अर्जित धन को आपस में बांटता था। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध गोवध निवारण अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में गिरोह की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी निर्दोष है। उसे राजनीतिक द्वेष में फंसाया गया है और वह क्षेत्र का निर्वाचित ब्लॉक प्रमुख है। वह 13 नवंबर 2025 से जेल में निरुद्ध है और किसी भी मामले में उसपर दोष सिद्ध नहीं हुआ है। सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ 2001 से अब तक 35 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और वह संगठित अपराध में संलिप्त है, इसलिए उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
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अदालत ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट के तहत जमानत पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह संतुष्टि कि आरोपी अपराध नहीं करेगा, महत्वपूर्ण शर्त है। आरोपी का आपराधिक इतिहास और पहली जमानत अर्जी खारिज होने के मद्देनजर यह नहीं कहा जा सकता कि वह जमानत पर रिहा होने के बाद अपराध नहीं करेगा। अदालत ने दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।