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Prayagraj: भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान में तैनात सहायक अभियंता की डिग्री मिली फर्जी

Mon, 22 Aug 2022 10:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ट्रिपलआईटी में गजराज सिंह 2008 में संविदा पर अवर अभियंता इलेक्ट्रिकल के पद पर तैनात हुआ था। 2010 में अभियंता इलेक्ट्रिकल का पद विज्ञापित हुआ तो उसे अवर अभियंता इलेक्ट्रिकल के पद पर स्थायी नियुक्ति मिल गई।
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आईआईटी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हर साल आईटी के इंजीनियर तैयार करने वाले भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में सहायक अभियंता सिविल के पद पर तैनात गजराज सिंह की डिग्री फर्जी मिली है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया की ओर से शैक्षिक विवरण के सत्यापन में सहायक अभियंता की बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग और डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग की डिग्री को फर्जी बताया गया है। इस पर संस्थान ने सहायक अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 

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ट्रिपलआईटी में गजराज सिंह 2008 में संविदा पर अवर अभियंता इलेक्ट्रिकल के पद पर तैनात हुआ था। 2010 में अभियंता इलेक्ट्रिकल का पद विज्ञापित हुआ तो उसे अवर अभियंता इलेक्ट्रिकल के पद पर स्थायी नियुक्ति मिल गई। अपने बायोडाटा में उसने बीई इलेक्ट्रिकल और डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग लिखा था। 2018 में सहायक अभियंता, सिविल का विज्ञापन निकला तो उसने इसके लिए भी आवेदन किया और उसकी नियुक्ति हो गई। लेकिन नियुक्ति पत्र में सिर्फ सहायक अभियंता ही लिखा हुआ था। 

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जामिया मिल्लिया से सत्यापन में हुई पुष्टि
गजराज सिंह दो साल प्रोबेशन पर रहा। इसके बाद उसे स्थायी नियुक्ति मिल गई। ऐसे में सवाल उठने लगे कि आखिर सिविल की कोई डिग्री न होने के बाद भी उसे कैसे सहायक अभियंता सिविल बना दिया गया। यदि उसके पास सिविल की डिग्री थी तो इलेक्ट्रिकल में कैसे नियुक्त हुआ। इसकी शिकायत हुई तो संस्थान के संयुक्त कुलसचिव ने उसकी डिप्लोमा और बीटेक की डिग्री का सत्यापन कराने के लिए मई 2022 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया को पत्र लिखा। 


संस्थान की ओर से बताया गया कि गजराज सिंह की बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिकल और डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिकल की डिग्रियां फर्जी हैं। ट्रिपलआईटी के कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर आरएस वर्मा का कहना है कि संबंधित अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर इस मामले में फोन पर गजराज सिंह का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उससे संपर्क नहीं हो सका।
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