झूंसी में बाढ़ के चलते ग्रामीणों के नाव चलाई जा रही हैं।
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800 मकानों में तीन दिन से बिजली आपूर्ति ठप
बाढ़ के कारण किसी अनहोनी से बचने के लिए कछार के तकरीबन 800 घरों की बिजली आपूर्ति भी तीन पहले ठप कर दी गई थी। इससे ग्रामीणों की मुसीबत और बढ़ गई है। बिजली गुल होने से रातभर प्रभावित गांवों में अंधेरा पसरा रह रहा है। साथ ही अन्य कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं।
2013 के बाढ़ जैसा नजारा
12 साल पहले 2013 में आई बाढ़ का नजारा लोगों के जेहन में ताजा होने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि 2013 में आई बाढ़ की शुरुआत भी कुछ ऐसे ही हुई थी। गांव के बुजुर्ग लाखन यादव, रामा पहलवान, सूरज, रामप्रताप यादव का कहना है कि 2013 की बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर दिया था। सैकड़ों ग्रामीण घर से बेघर हो गए थे।
झूंसी के छतनाग गंगा घाट पर नाव से अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाते ग्रामीण।
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अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचा बाढ़ का पानी, सिर्फ एक नाव से पहुंच रहे लोग
बाढ़ का पानी झूंसी के कछारी गांवों के साथ ही तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। जलस्तर बढ़ने से लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। वह ऊपरी मंजिल पर शिफ्ट हो गए हैं। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण झूंसी का छतनाग श्मशान घाट भी पूरी तरह से बाढ़ में डूब गया है। जिस वजह से शवों के अंतिम संस्कार में लोगों को परेशानी हो रही।
नाव से शव लेकर लोग अंतिम संस्कार करने पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को एक नाव पर शव के साथ ही करीब एक दर्जन ग्रामीण सवार हो गए। वहीं, आसपास मौजूद लोग नाव पर सवार लोगों को देखकर दंग रह गए। उन्होंने कहा कि लापरवाही के चलते किसी दिन भी हादसा हो सकता है। वहीं, प्रशासन इससे पूरी तरह अंजान बना हुआ है।
फूलपुर के बिरकाजी गांव निवासी 70 वर्षीय जीतलाल सोनी का देहांत शुक्रवार की सुबह हो गया था। दोपहर में तकरीबन ढाई बजे गांव के दो दर्जन जीतलाल का शव लेकर अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंचे थे। जलस्तर बढ़ने से शवों का अंतिम संस्कार घाट की टीले पर किया जा रहा है। जिसके बाद लोग छोटी नाव पर शव रखकर रवाना हो गए। वहीं, नाव गंगा की लहर और बहाव में डगमगा रही थी।