आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निर्धन मरीजों का इलाज न करने वाले 21 निजी अस्पतालों को काली सूची में डालने की कार्रवाई से हड़कंप मचा है।
सीएमओ ने 18 अस्पतालों को नोटिस जारी कर जांच शुरू कराई तो अब तक शून्य प्रगति वाले इन अस्पताल संचालकों ने एक-एक मरीज को भर्ती कर उनका उपचार किया। एक लाभार्थी का इलाज कर आयुष्मान भव होने वाले अस्पतालों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की पीएमजेएवाई (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) के तहत गरीब परिवारों को एक साल में पांच लाख तक नि:शुल्क इलाज दिया जाता है। पूरे जिले में योजना के 2.73 लाख लाभार्थी हैं। योजना के तहत 15 सरकारी अस्पतालों समेत कुल 162 चिकित्सालय सूचीबद्ध हैं।
लेकिन निजी अस्पताल गरीबों को इस योजना का लाभ देने में लापरवाही बरत रहे हैं। पिछले तीन महीनों में एक भी मरीज का इलाज न करने वाले अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया तो संबद्धता बचाने के लिए निजी अस्पताल संचालकों ने आनन-फानन जुलाई माह में एक-एक मरीज को भर्ती कर उपचार किया।
काली सूची में दर्ज हुए 21 निजी अस्पतालों में तीन ने इसी सप्ताह एक-एक लाभार्थी को भर्ती कर योजना की संबद्धता सूची (पैनल) में बने रहने के लिए सहयोग दिया है। इसकी ऑनलाइन रिपोर्ट शासन पहुंची तो योजना का संचालन करने वाली संस्था सांची ने सीएमओ और नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत डॉ. राहुल सिंह को लापरवाह अस्पतालों की जांच कर रिपोर्ट तलब की है।
आयुष्मान भारत योजना के संचालन में लाभार्थियों को लाभ न पहुंचाने वाले 36 निजी अस्पताल कार्रवाई के दायरे में हैं। खानापूरी के लिए एक लाभार्थी का इलाज करने वाले अस्पताल संचालकों की बिंदुवार जांच की जा रही है। कार्रवाई से पहले संचालकों को सुधार के लिए एक मौका दिया जाएगा।
डॉ. जीएस बाजपेयी, सीएमओ