त्रिवेणी संगम पर स्नान करते श्रद्धालु
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आषाढ़ पूर्णिमा पर शनिवार को संगम में श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। पुण्यदायिनी पूर्णिमा पर स्नान के साथ ही तटों पर राष्ट्र, समाज से लेकर परिवार तक की मंगलकामना के लिए अनुष्ठान किए गए। रेती पर हवन कुंड बनाकर आहुतियां दी गईं। इस दौरान त्रिवेणी की सविधि पूजा के साथ दीपदान भी किया गया। इस बार पूर्णिमा दो दिन की है। गुरु पूर्णिमा की मान्यता रविवार को होगी।
शनिवार को दिन में 11:36 बजे से पूर्णिमा लगने की वजह से व्रतियों ने संगम पर दिन भर स्नान-दान किया। व्रत की पूर्णिमा शनिवार को मनाई गई। जबकि पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में पुण्य दायिनी गुरु पूर्णिमा का पुण्य काल रविवार की सुबह सूर्योदय से लेकर दिन के 10:14 बजे तक रहेगा। ऐसे में गुरु पूर्णिमा रविवार को ही मनाई जाएगी।
इससे पहले आषाढ़ पूर्णिमा पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह से ही दशाश्वमेध घाट, रामघाट, काली घाट के अलावा अन्य घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाने के लिए पहुंचने लगे। कोरोना संक्रमण के बीच संगम पर आषाढ़ पूर्णिमा पर स्नानार्थियों के पहुंचने से चहल-पहल बढ़ गई। रेती पर एक तरफ वाहनों की कतारें लगीं और दूसरी ओर तीर्थ पुरोहितों की चौकियों पर माथे-माथे पर आस्था के तिलक-त्रिपुंड लगते रहे।
वीआईपा घाट, किला घाट पर भी महिलाओं ने पूर्णिमा स्नान के साथ दान किया। जबकि, संगम पर सुरक्षा के लिए लगाई गई जेटी के बीच श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। डुबकी लगाने के साथ ही कोई रेती पर शिवलिंग बनाकर दीप जलाता रहा तो कोई ध्यान और जप में लीन था। तीर्थपुरोहित राजमणि तिवारी के मुताबिक इस दिन व्रत की पूर्णिमा की मान्यता होने की वजह से हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं ने स्नान -दान किया।
साधु-संतों ने भी संगम की रेती पर स्नान के साथ ही दान किया। तीर्थपुरोहित सोहन लाल जोशी ने पूर्णिमा पर कोरोना वायरस से मुक्ति के लिए यज्ञ कराया। इस दौरान सामाजिक दूरी का पालन करते हुए आहुतियां दी गईं।
संगम पर बाजे गाजे के साथ ध्वजा -निशान की पूजा
प्रयागराज। आषाढ़ पूर्णिमा पर शनिवार को बाजे गाजे के साथ श्रद्धालु ध्वजा पूजन के लिए भी संगम पर पहुंचे। कई समूहों में सुबह से ही ध्वजा-निशान लेकर श्रद्धालु संगम पहुंचते रहे। इस दौरान त्रिवेणी तट पर ध्वज की पूजा के साथ ही लोग झूमते-नाचते रहे। गंगा पूजन के बाद बड़े हनुमान को ध्वजा अर्पित की गई।