लाठी से पिटाई के बाद गला दबाकर जाल में फंसे तेंदुए को मौत के घाट उतारा गया था। पेट में भी चोट के निशान मिले। पिटाई के चलते अधिक रक्तस्राव भी हुआ था। चिलबिला जंगल में वीडियोग्राफी के बीच पशु चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया। जंगल में ही गड्ढे में डालकर उसे जलाया गया। इस दौरान जंगल की ओर जाने से हर किसी को रोक दिया गया था।
मानधाता के कुशफरा देवीदास का पुरवा जंगल में शिकारियों के जाल में फंसे तेंदुए को लोगों ने पहले पीटा। इसके बाद लाठियों से गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया। वन विभाग के अफसरों व पुलिस के सामने तेंदुए की मौत हो गई। रविवार की सुबह से तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी चिलबिला में वन विभाग के जंगल में होती रही। चिलबिला जंगल में डीएफओ बीआर अहिरवार की मौजूदगी में उप पशु चिकित्साधिकारी एनपी सिंह, पशु चिकित्सक रत्नेश तिवारी व डा. केशव की मौजूदगी में पशुपालन विभाग की टीम वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम करने लगी।
करीब तीन घंटे तक चले पोस्टमार्टम के बाद तेंदुए की मौत गला दबाने के साथ ही पेट में आई चोट से हुए अधिक रक्तस्राव से मौत होने की पुष्टि हुई। जंगल में बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दिया गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव को जंगल में ही खोदे गए गड्ढे में डालकर जला दिया गया। आग बुझने के बाद ऊपर से मिट्टी डालकर कब्र बना दी गई। डीएफओ बीआर अहिरवार ने बताया कि तेंदुए की मौत गला दबने से दम घुटने के कारण होने की बात सामने आई है। वन्य जीव का पोस्टमार्टम एकांत स्थान पर ही कराने का प्राविधान है।
तेंदुए की मौत का कारण पता करने के लिए भले ही पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने प्रथम दृष्टया गले में आई चोट व दम घुटने से मौत होने का दावा कर रहे हैं लेकिन उसकी स्पष्ट मौत के लिए बिसरे को प्रिजर्व कर लिया गया है। जिसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद मौत का कारण स्पष्ट होगा।
वन्य जीव तेंदुए के शव का अंतिम संस्कार कराने के लिए चिलबिला जंगल में रविवार को तमाम सामाजिक संगठन के लोग भी मौजूद रहे। सब लोगों की मौजूदगी में करीब चार पांच घंटे तक शव का पोस्टमार्टम कराने के साथ ही अंतिम संस्कार तक लोग डटे रहे। जबकि मीडिया के लोगों से वन विभाग के अफसर दूरी बनाए रखे।
कुशफरा के जंगल में तेंदुए की हत्या वन्य जीव तस्करों की करतूत तो नही है। पोस्टमार्टम के दौरान पंजे से एक नाखून गायब मिला। उसकी हत्या में भी शिकारियों की साजिश लग रही है। मौके पर पुलिसकर्मी व वन विभाग के अफसर मौजूद थे लेकिन सभी की खामोशी कुछ और ही बयां कर रही थी। जिसे लेकर अब लोग पुलिस व वन विभाग के अफसरों पर सवार उठा रहे हैं।
मानधाता कोतवाली इलाके के कुशफरा जंगल में बंगाल के शिकारियों के जाल में फंसे तेंदुए को लाठी डंडे से पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया। जबकि वह जाल में फंस गया था। वह किसी के ऊपर हमला नहीं कर सकता था। उसे आसानी से वन विभाग पकड़ सकती थी। सूचना के बाद वन विभाग के अफसर मौके पर जरूर पहुंचे लेकिन तमाशबीन बने रहे। इस दौरान शिकारियों ने तेंदुए के पंजे से एक नाखून काट लिया। शिकारियों के उकसावे में आकर ग्रामीण जाल में फंसे तेंदुए को पीटते रहे, गर्दन को लाठियों से दबाया गया। पेट में आई चोटों से अधिक रक्तस्राव हो गया। पोस्टमार्टम के दौरान उसके गले तक रक्त भरा हुआ था।
खास बात यह रही कि सबसे पहले जानकारी मिलने पर शनिदेव धाम चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी पहुंचे। पुलिसकर्मी जाल को कसवाने लगे ताकि तेंदुए को काबू किया जा सके। घटना की जानकारी पर डीएफओ बीआर अहिरवार भागकर कखाली हाथ पहुुंचे। वन विभाग के अफसर लोगों को जाल में फंसे तेंदुए के ऊपर से पकड़ ढीली करने के बजाय अधिकारियों से वार्तालाप तक ही सीमित रहे। जाल में फंसा तेंदुआ बेदम हो चुका था।
उसे आसानी से पकड़ा जा सकता था लेकिन वन विभाग की टीम तमाशबीन बनी रही। तेंदुए की मौत के बाद जाल लेकर सुलतानपुर से आए शिकारी वहां से भाग निकले। चर्चाओं पर यकीन करें तो तेंदुए की हत्या के पीछे वन्य जीव तस्करों का हाथ लगता है। कही तेंदुए या वन्य जीव के अंगों की तस्करी करने वालों की साजिश का यह काम हिस्सा तो नही है। ये कोई पहला मामला नही है जब जिले में तेंदुए को भीड़ ने मार डाला हो। इसके पहले भी बाघराय कोतवाली में पंपिंगसेट के कुएं में गिरे तेंदुए को पुआल डालकर जला दिया गया था। एक तेंदुए को जिंदा पकड़कर कानपुर भेजा गया था।
वन्य जीवों की जानकारी जुटाने के लिए जंगल व तराई इलाकों का भ्रमण करना वन विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी में शामिल है। जिस तरह पुलिस सड़कों पर रात्रि व दिन में ड्यूटी करती है। ठीक उसी तरह दिन रात जंगलों में वन विभाग के कर्मचारियों पर नजर रखना होता है लेकिन वन विभाग के अफसर से लेकर कर्मचारी तक केवल लकड़ी को ही निशाना बनाकर अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं। अपनी ड्यूटी को भुला बैठे कर्मचारी जरूरत पड़ने पर होश गंवा देते है। वन विभाग ने अपने यहां ही अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
कुशफरा जंगल में लाठी डंडे से पीटकर तेंदुए की हत्या करने वाले लोगों को वायरल होने वाली वीडियो व तस्वीरों से करने की तैयारी में वन विभाग के अफसर जुटे हुए हैं। तेंदुए की हत्या करने वालों को चिह्नित करने में वन क्षेत्राधिकारी जांच करने लगे हैं।
वन्य जीवों के संरक्षण के लिए सरकार हर साल लाखों रुपये खर्च करती है। इसके बावजूद जिले में वन्य जीवों की लगातार हत्या की जा रही है। सवाल यह उठा रहा है कि वन विभाग के अफसरों के उदासीन रवैये के कारण वन्य जीवों की कब तक हत्या होती रहेगी। इसकी रोकथाम के लिए व्यवस्था अलग से क्यों नहीं की जाती।