तत्कालीन इंस्पेक्टर धूमनगंज राम नवमी यादव एनकाउंटर स्पेशलिस्ट माने जाते थे। उन्हें माशूक के गिरोह को खत्म करने की कमान सौंपी गई। इंस्पेक्टर राम नवमी यादव ने माशूकउद्दीन के भाई मोहिउद्दीन को मुठभेड़ में मार गिराया, लेकिन माशूकउद्दीन बच गया था। इस घटना के बाद माशूकउद्दीन ने 20 साल तक राम नवमी यादव के रिटायर होने की इंतजार किया। 1995 में सेवानिवृत इंस्पेक्टर राम नवमी यादव के बेटे बलवंत यादव की इंडियन ऑयल डिपो झलवा के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में माशूकउद्दीन और भतीजे असलूब को नामजद कराया गया था। हालांकि, बाद में न्यायालय दोनों दोषमुक्त हो गए थे।
रिटायर्ड इंस्पेक्टर के बेटे की हत्या के बाद जब वे नामजद हुए तो क्षेत्र में उनका बड़ा दबदबा हो गया। इसी बीच माशूकउद्दीन अतीक के भी संपर्क में आ गया। अतीक उस समय ऐसे ही लोगों को तलाश कर गिरोह में शामिल कर रहा था, जिसका क्षेत्र में आतंक हो।
माशूक और परिवार वालों पर दर्ज मुकदमे
1-माशूकउद्दीन : 16 मुकदमे
2-शाहजमन (माशूक का बेटा) : 11 मुकदमे
3-असलूब (माशूक का भतीजा) : 10 मुकदमे
4-शाह फाहेद (माशूक का बेटा) : पांच मुकदमे
5-शाह फैसल (माशूक का बेटा) : दो मुकदमे
6-शाह सऊद (माशूक का बेटा) : पांच मुकदमे
7-सऊद फैसल (माशूक का बेटा : एक मुकदमा
8-शाह खालिद (माशूक का बेटा) : एक मुकदमा
9-शाह औरंगजेब (माशूक का बेटा) एक मुकदमा
10-शाहनवाज ( माशूक का बेटा) : मुकदमा नहीं