बिजली उपकेंद्र सिकंदरा से अघोषित कटौती से 85 गांवों के लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बिजली कटौती से रात में लोगों की नींद हराम हो गई है। हाल यह है कि लगातार छह घंटे भी बिजली मिलना मुश्किल हो गया है।
बिजली उपकेंद्र सिकंदरा से संचालित छह फीडरों बलिकरनपुर, तेजपुर, बहरिया, वीरभानपुर, कल्याणपुर और बलीपुर के माध्यम से क्षेत्र के बहरिया और सिकंदरा कस्बा सहित 85 गांवों के 20 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को आपूर्ति की जाती है।
स्थानीय लोग दिन में तो अपने काम धंधे के सिलसिले में बाहर रहते हैं। किंतु रात्रि के समय जब वे घरों पर आते हैं तो बिजली नदारद रहती है। रात में ही कई बार घंटे दो घंटे के लिए कटौती की जाती है। यह सिलसिला एक सप्ताह से ट्रांसफार्मरों के ओवरलोड होने से बढ़ गया है। इस संबंध में अवर अभियंता विद्युत उपखंड सिकंदरा वीरेंद्र कुमार ने बताया कि 220 केवी उप स्थान महावीरन फूलपुर से रात में कंट्रोलर ओवरलोड पर आपूर्ति बंद करा देता है। हमारे उपखंड को जो भी आपूर्ति मिल रही है, उसका वितरण सुनिश्चित कर रहे हैं।
भीषण गर्मी से बिजली आपूर्ति बाधित, गांवों में अंधेरा
भीषण गर्मी के कारण इलाके की बिजली आपूर्ति पटरी से उतर गई है। सुबह से शाम तक बिजली की आवाजाही बनी रहती है। शाम होते ही तमाम गांवों में अंधेरा छा जाता है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
132 केवीए पावर स्टेशन कौड़िहार से उपकेंद्र नवाबगंज, कौड़िहार, फतेहपुर कायस्थान, शृंग्वेरपुर और सेरावां से जुड़े गांवों को बिजली मिलती है। बीते एक सप्ताह से रात में बिजली कब चली जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। बिजली कटाैती से किसानों के सामने धान रोपाई को लेकर दिक्कत उत्पन्न हो गई है। उनके मुताबिक, खेतों में पानी पहुंचाने से पहले ही बिजली चली जाती है। तीन घंटे का काम अब तेरह घंटे में पूरा हो रहा है। जल निगम की संस्थाएं जरूरतमंद लोगों को पानी उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हुई हैं।
फाफामऊ के उपखंड अधिकारी जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग में वृद्धि हुई है। बिजली कटौती का यह मामला ट्रांसमिशन से जुड़ा है। तमाम समस्याओं के बावजूद उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने का प्रयास किया जा रहा है।
इलाके में बिजली व्यवस्था बेपटरी, ग्रामीण परेशान
इलाके में बिजली व्यवस्था बेपटरी हो गई है। दिन और रात की कटौती से ग्रामीण परेशान हैं। पिछले संपूर्ण समाधान दिवस में भी ग्रामीणों ने इस समस्या पर नाराजगी जताई थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों को 24 घंटे में केवल 8-10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। बीते मई माह में आए आंधी-तूफान के बाद से स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। पर्याप्त बिजली न मिलने से धान की नर्सरी सूख रही है। निजी पंप सेटों से भी समय पर पानी नहीं मिल पा रहा है। नेवढि़या विद्युत उपकेंद्र की स्थिति बेहद खराब है। रात में खराबी आने पर आपूर्ति अगले दिन ही ठीक होती है। मेजा के एसडीओ सुरजीत कुमार ने बताया कि बिजली आपूर्ति सुचारू है। उन्होंने कटौती को रोस्टिंग का हिस्सा बताया।