dr. k. sevan
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देश में गरीबी और भूखमरी के मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। इसके लिए युवाओं को आगे आना होगा। शनिवार को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के पंद्रहवें ई-दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल अंतरिक्ष विभाग के सचिव और भारतीय अंतरिक्ष आयोग (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. के सिवन ने कहा कि पिछली आधी सदी में हुई प्रगति के बाद भी हमारे पास गरीबी, भुखमरी, अच्छी स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता,, स्वच्छ पेयजल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सहित कई मुद्दों का समाधान किया जाना जरूरी है। उन्होंने छात्रों से कहा कि इसके लिए उन्हें आगे आना चाहिए।
कोरोना के चलते ऑनलाइन आयोजित किए गए दीक्षांत समारोह में डॉ. सिवन ने मेधावियों को सम्मानित भी किया। कहा कि आज जीवन के सभी क्षेत्र कहीं न कहीं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की घोषणा से अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इन सुधारों से निजी क्षेत्र को स्टार्टअप के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी अंतरिक्ष मिशन शुरू करने की अनुमति मिलेगी। इससे नवाचार, तकनीकी विविधता और मानव संसाधन विकास हो सकेगा।
डा. सिवन ने कहा कि गगनयान भारत के लिए बहुत जरूरी है। इससे देश की विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षमता का विकास होगा। उन्होंने देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम का उल्लेख किया। कहा, 1960 में अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू करना बहुत क्रेजी आइडिया था। देश को बदलने में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की क्षमता का सही अनुमान लगाते हुए डॉ.विक्रम साराभाई ने कहा था, ऐसे समय में जब पूरी दुनिया वर्चस्व के लिए लड़ रही है, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से हम भारत जैसे विशाल आकार और विविधता वाले देश का विकास कर सकते हैं। आज ेइसका परिणाम हमारे सामने है।