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पौष पूर्णिमा की डुबकी के लिए रेती पर डेरा

Sun, 24 Jan 2016 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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माघ मेले के दूसरे महत्वपूर्ण स्नानपर्व पौष पूर्णिमा पर रविवार को डुबकी के साथ माघ भर का कल्पवास का अनुष्ठान भी आरंभ होगा। सुबह पुण्यकाल में संगम सहित गंगा के विभिन्न घाटों में स्नान के साथ  कल्पवास का व्रत-संकल्प लिया जाएगा। डुबकी के साथ ही महीने भर के स्नान, दान जप का अनुष्ठान शुरू हो जाएगा। हालांकि पूर्णिमा तिथि का संचरण शनिवार की सुबह 7.14 बजे होने से श्रद्धालुओं ने पौष  पूर्णिमा का स्नान कर गंगा पूजन किया और कल्पवास के अनुशासन का व्रत भी लिया। तीर्थ पुरोहितों ने यजमानों को कल्पवास का संकल्प दिलाकर पूजा-अर्चना कराई। कल्पवासियों ने गंगा पूजन के बाद तुलसी का बिरवा रोपा और जौ बोया।
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वहीं उदयातिथि की परंपरा मानने वाले श्रद्धालु  रविवार की सुबह पूर्णिमा का स्नान करेंगे। पुण्यकाल सूर्योदय से शाम 5,34 बजे तक होने से पूरे दिन स्नान होगा। माघ मेला क्षेत्र में किलाघाट से लेकर दशाश्वमेधघाट तक चौदह स्नान घाट बनाए गए हैं। 
तीर्थपुरोहितों सहित संतों के शिविरों में कल्पवास करने आए श्रद्धालुओं ने दिन भर तैयारियों में बिताया। पुराने साथियों के मिलने से रास्ते की थकान पल भर में दूर हो गई। मोरी मार्ग स्थित राजेंद्र पालीवाल के शिविर में कल्पवास की तैयारियों में व्यस्त फैजाबाद से आईं प्रकाश कुमारी ने कहा, गंगा मइया की कृपा से संगम की रेती पर एक बार फिर कल्पवास का अवसर मिला है। माह भर चित्रकूट में रहकर आईं मखनी देवी ने कहा, चालीस वर्षों से कल्पवास का पुण्य मिल रहा है। एक महीने रहकर पूरे वर्ष भर की ऊर्जा समेट कर हम घर को लौटेगे। फैजाबाद के ही तेज बहादुर सिंह ने कहा, संगम में स्नान की अनुभूति अलौकिक है।  पौष पूर्णिमा से कल्पवास का संकल्प लेने वाले श्रद्धालुओं का जप, तप, स्नान के साथ षटतिला का अनुशासन भी शुरू हो जाएगा। मासपर्यंत तिल का प्रयोग किया जाएगा। तिलयुक्त जल से स्नान, तिल से तर्पण, उबटन, हवन, यहां तक कि भोजन में भी तिल शामिल होगा। आचार्य विद्याकांत पांडेय के मुताबिक माघ मास के दौरान शिव मंदिर में तिल के तेल का दीया जलाना पुण्यदायी है।
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पूर्णिमा तिथि का संचरण शनिवार की सुबह 7.14 बजे से हुआ जो रविवार की सुबह 6बजेकर 57 मिनट तक रहेगा। उसके बाद माघ मास की प्रतिपदा आरंभ हो जाएगी। ज्योतिर्विद आशुतोष वार्ष्णेय के मुताबिक उदयातिथि रविवार को होने से पूर्णिमा का स्नान रविवार को होगा। पुण्यकाल सूर्योदय से शाम 5बजकर 34 बजे तक रहेगा। 
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