पिछले वर्ष बनकर तैयार हुई पुलिस लाइन स्थित माडर्न कंट्रोल रूम की नई इमारत भूकंप के झटकों को नहीं झेल पाई। मामूली झटकों में ही नई इमारत के चौथी मंजिल के पिलर्स में दरारें आ गईं। दरारें देख चौथी मंजिल पर कंट्रोल रूम पर कॉल रिसीविंग में जुटे पुलिस वालों के हाथ पांव फूल गए। माडर्न कंट्रोल रूम को खाली करा दिया गया। दोपहर बारह बजे से तीन बजे तक कंट्रोल रूम में न तो कोई कॉल रिसीव हुई, न ही पेट्रोलिंग कार को निर्देश दिए गए। भूकंप के झटकों से कंट्रोल रूम की खिड़की के शीशे भी टूट गए।
जैसे ही शीशे टूटे, पुलिस वाले अपनी बाइक और कारों को इमारत से दूर ले गए। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) की एजी आफिस के समीप स्थित इमारत की दीवारों में भी हल्की दरारें आ गईं। दहशत के चलते पीएचक्यू समेत पुलिस के सारे दफ्तर खाली हो गए। पुलिस कंट्रोल रूम में काम तीन बजे के बाद शुरू हो सका। तीन घंटे तक फरियादियों की बात सुनने वाला कंट्रोल रूम में कोई नहीं था।
भूकंप का जैसे ही पहला झटका लगा सिविल लाइंस, खुल्दाबाद, कीडगंज, दारागंज, कैंट, धूमनगंज, करेली, मुट्ठीगंज समेत सारे थाने खाली हो गए। वायरलेस सेट पर जवाब देने वाला कोई नहीं बचा था। पुलिस वाले कुछ देर बाद फिर से थाने में गए लेकिन हालात सामान्य होने के पहले फिर से मेज-कुर्सी हिलने लगी। दूसरा झटका लगा तो सभी की हिम्मत जवाब दे गई। दोबारा थानों में जाने की हिम्मत कोई नहीं दिखा पाया। पुलिस लाइन और खुल्दाबाद की पुलिस कालोनी के फ्लैट भी खाली हो गए। खुल्दाबाद कालोनी में तो लोग शाम को फ्लैट में तो चले गए, लेकिन किसी को नींद नहीं आई। इस कालोनी के एक फ्लैट का बारजा कुछ दिन पहले गिर गया था। अधिकांश फ्लैट की दशा काफी खराब है।