इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में नौकरी का अनुभव किसी भर्ती विज्ञापन में निर्धारित सरकारी कार्यालय के अनुभव के बराबर नहीं माना जा सकता। क्योंकि केवल इस आधार पर कि कोई संस्था संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य की परिभाषा में आती है उसे सरकारी कार्यालय नहीं माना जा सकता।
यह टिप्पणी संग न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने याची सत्य प्रकाश की ओर से उच्च शिक्षा विभाग में रजिस्ट्रार पद के लिए उम्मीदवारी खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर की है। कोर्ट ने 11 सितंबर को उनकी उम्मीदवारी खारिज करने वाली अधिसूचना में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
15 साल का अनुभव मांगा गया था
मामले में 17 अक्तूबर 2024 को जारी भर्ती विज्ञापन में रजिस्ट्रार पद के लिए विश्वविद्यालय, सरकारी कार्यालय या उच्च शिक्षा संस्थान में प्रशासनिक एवं पर्यवेक्षण स्तर पर 15 वर्ष का अनुभव अथवा कॉलेज या विश्वविद्यालय में 15 वर्ष का शिक्षण अनुभव निर्धारित किया गया था। याची के पास 18 वर्ष से अधिक का कार्य अनुभव था। उनका दावा था कि पीएनबी संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य है, इसलिए बैंक में प्राप्त अनुभव को सरकारी कार्यालय का अनुभव माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दलील दी कि राष्ट्रीयकृत बैंक के कर्मचारी कानून की नजर में लोक सेवक हैं और विज्ञापन में सरकारी कार्यालय की स्पष्ट परिभाषा भी नहीं दी गई है।
कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 12 में किसी संस्था का राज्य की श्रेणी में आना और किसी कानून के तहत उसके कर्मचारियों का लोक सेवक होना अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं। इन्हें भर्ती विज्ञापन में इस्तेमाल किए गए सरकारी कार्यालय शब्द का समानार्थी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि याची की ओर से ऐसा कोई आधार सामने नहीं रखा गया जिससे पीएनबी को सरकारी कार्यालय माना जा सके या उसके कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत संरक्षण प्राप्त होने की बात साबित हो।