माघ मेला अभी दूर है पर गंगा जल का रंग काला है, इस पर दिल्ली से लखनऊ तक हड़कंप मचा है। अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) ने बृहस्पतिवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी से जानकारी ली फिर जांच रिपोर्ट तलब की है। क्षेत्रीय अधिकारी का दावा है कि जांच में प्रदूषण नियंत्रित और बीओडी की मात्रा 2.5 से 2.5 तक है।
अमर उजाला के बृहस्पतिवार के अंक में गंगा में जलीय प्रदूषण और जल का रंग काला होने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई। खबर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की नींद टूटी। आननफानन में पांच स्थानों से गंगा और यमुना जल के नमूने लेकर जांच को भेजे गए।
आज भी गंगा का जल कहीं काला, कहीं पीला-पीला
माघ मेला निकट पर निर्मल गंगा के संकल्प को पूरा करने में लगे विभागों के अफसर फिक्रमंद नहीं हैं। बृहस्पतिवार को भी दारागंज, रसूलाबाद गंगा घाटों पर गंगा जल का रंग कहीं काला तो कहीं पीला-पीली दिखा। गंगा जल का रंग देखकर दूर-दूर से आए श्रद्धालु डुबकी तो लगाते हैं, लेकिन डिब्लों में जल भरने से उसकी शुचिता पर संदेह करते हैं। घाटों के किनारे तमाम प्रयास के बाद भी सफाई के उपाय न के बराबर हैं। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि गंगा हमारी श्रद्दा का आधार हैं, पर उनकी अविरल निर्मल धारा बनी रही, इस बारे में कुंभ के दौरान किए गए प्रयासों को जारी नहीं रखा गया।
साल भर से नहीं स्क्रीमर मशीन
नमामि गंगे योजना के तहत गंगा की सफाई के लिए मंगाई गई स्क्रीपर मशीन साल भर पहले टेंडर समाप्त हो जाने के बाद दोबारा नहीं आई। नगर निगम अफसरों ने घाटों की सफाई का काम एक एजेंसी को दे दिया पर निगरानी नहीं की। माघ मेला आने पर गंगा की स्वच्छता के नाम पर सिर्फ दिखावा नजर आ रहा है।
छोटा बघाड़ा समेत कई इलाकों में सीवर की गंदगी से गंगा मैली
गंगा की सफाई में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के सीवरेज कार्य भी मुसीबत बने हैं। छोटा बघाड़ा सहित गंगा के कई कछारी इलाकों में लाइन चोक होने से सीवर का गंगा पानी सड़कों-गलियों में भरने के साथ सीधे गंगा में गिर रहा है। इस संबंध में शिकायत या निर्देश का इकाई के अफसरों पर कोई असर ही नहीं पड़ता।
नालों में बायोरेमिडेशन ट्रीटमेंट की दी जानकारी
पीएमओ से हुई पूछताछ में नगर निगम के अफसरों ने रिपोर्ट दी है कि शहर के 41 नालों का बायोरेमिडेशन विधि से ट्रीटमेंट किया जा रहा है। अफसरों ने सफाई दी है कि नालों का जो पानी नदियों में जा रहा है वह जहरीला नहीं है। नालों का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। जबकि सच्चाई कुछ और है। रसूलाबाद के पार्षद मुकुंद तिवारी कहते हैं कि नाला सफाई और ट्रीटमेंट के नाम पर धोखा किया जा रहा है। बिना शोधन के ही गंदा पानी गंगा में छोड़ा जा रहा है। वहीं लखनऊ से भी इस संबंध में दिन भर पूछताछ होती रही। स्थानीय प्रशासनिक अफसरों ने टीम भी गंगा घाटों पर पहुंची। साधु-संतों के साथ तीर्थ पुरोहितों में भी गंगा जल की शुचिता के बारे में चिंता और अफसरों की लापरवाही पर नाराजगी रही।
केंद्रीय टीम को दिखाने के लिए शुरू किया ट्रीटमेंट
नमामि गंगे योजना के तहत गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और नगर निगम की कार्यदायी संस्थाएं एसटीपी संचालन और नालों के ट्रीटमेंट के नाम पर खानापूरी कर रही हैं। तीन दिन पहले यहां आई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम सदस्यों के निरीक्षण में सब कुछ सही दिखे, इसलिए कुछ स्थानों पर नालों का ट्रीटमेंट किए जाने का दिखावा किया गया। पार्षद कमलेश सिंह का आरोप है कि नैनी सहित कई अन्य एसटीपी पूरी क्षमता से नहीं चलाई जा रही हैं। रात में बिना शोधन के गंदा पानी नदियों में छोड़ा जा रहा है, इसलिए गंगा-यमुना का जल प्रदूषित हो रहा है।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें गंगा जल की नियमित जांच करती हैं। बृहस्पतिवार को पांच स्थानों पर हुई जांच में गंगा जल में बीओडी की मात्रा 2.2 से 2.5 पाई गई है। घाटों पर स्नानार्थियों की वजह से जल का रंग बदला है। - प्रदीप विश्वकर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- गंगा जल की स्वच्छता बनाए रखने के लिए कुंभ के दौरान शुरू नालों का ट्रीटमेंट करने का काम अभी जारी है। स्क्रीमर मशीन मंगाने के बारे में औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। घाटों की सफाई के लिए एजेंसी के साथ नगर निगम के कर्मचारी भी लगाए गए हैं।- उत्तम वर्मा, पर्यावरण अभियंता नगर निगम