इलाहाबाद। शहर में पिछले साल के चर्चित रेप केस में इलाहाबाद पुलिस की संदिग्ध भूमिका को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी गंभीरता से लिया है। इस घटना में बलात्कार का आरोप एक दरोगा पर है मगर पुलिस ने जांच के लिए डॉक्टर द्वारा तैयार स्लाइड ही गायब कर दी। अब पुलिस पीड़ित लड़की से वह कपड़ा मांग रही है, जिसे उसने घटना के वक्त पहन रखा था। मगर पुलिस पर भरोसा नहीं होने के कारण पीड़ित ने इनकार कर दिया। आयोग ने यूपी के डीजीपी को आदेश दिया है कि वह अपनी मौजूदगी में पीड़ित से कपड़ा सील करा किसी दूसरे अफसर से इस केस की जांच कराएं। डीजीपी को पीड़ित लड़की की सुरक्षा की भी हिदायत देते हुए आयोग ने चार हफ्ते में आदेश पर अमल की आख्या मांगी है।
अल्लापुर इलाके की एक युवती के साथ 10 मई 2014 को दोपहर करीब ढाई बजे मीरापुर पुलिस चौकी में रेप किया गया था। युवती का आरोप है कि उसके साथ तत्कालीन चौकी प्रभारी अशोक शुक्ला ने बलात्कार किया था। मगर इलाहाबाद पुलिस ने इस मामले में खूब खेल किया। उस स्लाइड को ही गायब कर दिया जिसे मेडिकल बोर्ड के डॉक्टर ने जांच के लिए तैयार किया था। आरोपी दरोगा के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। फिर युवती से वह कपड़ा मांगा जाने लगा जिस पर रेप के सुबूत मौजूद हैं। मगर स्लाइड गायब होने में पुलिस के खेल से सशंकित युवती ने मना कर दिया। उसी दौरान एक लड़की की ओर से पीड़ित के मददगार दंपति के खिलाफ रेप का केस लिखा गया, जिसे फर्जी कहा जा रहा है। आला अफसरों का भी रवैया निराशाजनक रहा तो पीड़ित युवती को लेकर उसके मददगार दंपति ने 26 दिसंबर को दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में जाकर फरियाद की।
आयोग ने इस मामले में इलाहाबाद पुलिस की भूमिका को सही नहीं मानते हुए पिछले हफ्ते डीजीपी को आदेश जारी किया कि वह पीड़ित लड़की से रेप के अहम सुबूत कपड़े को अपने सामने सील कराकर अपने दस्तखत करें। आयोग ने डीजीपी से यह भी कहा कि इस मसले से जुड़े दोनों मुकदमे की जांच किसी सक्षम अधिकारी और बेहतर होगा कि महिला पुलिस अफसर से कराई जाए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी को निर्देेश दिया है कि रेप की पीड़ित युवती की हिफाजत सुनिश्चित कर चार हफ्ते के भीतर इस बाबत की गई कार्रवाई की आख्या दें।
पुलिस चौकी के भीतर दरोगा द्वारा युवती से बलात्कार के इस गंभीर मसले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी पीड़ित की शिकायत पर माना है कि पुलिस ने इसमें संदिग्ध भूमिका अदा की। यूपी के डीजीपी को भेजे पत्र में आयोग की ओर से लिखा गया है कि रेप के बाद घंटे भर के भीतर एसएसपी के सामने पीड़ित ने जाकर शिकायत की लेकिन उसका मेडिकल टेस्ट 36 घंटे बाद कराना, एफआईआर छह दिन बाद दर्ज होना, फिर पीड़ित के मददगार दंपति के खिलाफ भी बलात्कार का मुकदमा, जांच के लिए तैयार स्लाइड गायब होने से इलाहाबाद पुलिस की भूमिका निश्चित तौर पर सवालों के घेरे में है। पीड़ित ने तो मांग की है कि उसके मुकदमे की जांच पुलिस की बजाय किसी और एजेंसी से कराई जाए।