इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रश्नगत चेक पर खाताधारक का हस्ताक्षर मौजूद है तो वह चेक चोरी का बहाना बताकर उसकी अदायगी के दायित्व से मुक्त नहीं हो सकता। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की एकल पीठ ने गौतमबुद्ध नगर निवासी जमीन कारोबारी राहुल यादव की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चेक अनादरण के केस में हस्ताक्षर को स्वीकार किया गया है तो यह मामला प्रथम दृष्टया पीड़ित पक्ष को अंतरिम राहत देने का बनता है।
याची राहुल ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पीड़ित पक्ष को मामले की सुनवाई के दौरान 20 प्रतिशत अंतरिम रकम अदा करने का आदेश दिया गया था। मामला गौतमबुद्ध नगर के सेक्टर-39 थाना क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता रोहित सिंह ने जमीन कारोबारी राहुल के खिलाफ परिवाद दाखिल किया। आरोप लगाया कि राहुल ने उससे 10 लाख रुपये कर्ज लिए थे। उसे अदा करने के लिए छह लाख के तीन और एक लाख के तीन चेक दिए थे, जो खाते में अपर्याप्त रकम व खाता बंद होने के आधार पर अनादृत कर दिए गए। कोर्ट ने याची को दो माह में पीड़ित को दो लाख रुपये अदा करने की अंतरिम राहत दी थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट याची ने पहले पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। इसके खारिज होने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अधिवक्ता ने दलील दी कि याची की कार से चोरी कर चेक का दुरुपयोग किया गया है। याची ने शिकायतकर्ता को कोई चेक जारी नहीं किया। हालांकि, कोर्ट ने याची की दलील बेदम मानी। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी। साथ ही ट्रायल कोर्ट के आदेश पर अपनी मुहर लगा दी।