इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपितों के खिलाफ सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर पीडि़ता की प्रोटेस्ट अर्जी खारिज करने की वैधता की चुनौती याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा मेडिकल व फारेंसिक जांच रिपोर्ट घटना की पुष्टि नहीं करते। पीड़िता के निजी अंगों में कोई चोट नहीं पाई गई। उसने कैंची या चाकू से अपने कपड़े स्वयं फाड़े। जांच में पीडि़ता पर जहर के असर के सबूत नहीं मिले। कोई स्वतंत्र गवाह नहीं।
आरोपियों की लोकेशन घटना के समय अलीगढ़ में न होकर दूसरी जगह पाई गई। ऐसे में सीबीआई अदालत गाजियाबाद द्वारा केस चलाने से इंकार कर और पुनरीक्षण अदालत ने अर्जी खारिज कर कोई वैधानिक गलती नहीं की है। कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोप में सीबीआई को क्लोजर रिपोर्ट निरस्त कर समन जारी कर ट्रायल करने की मांग को लेकर शिकायतकर्ता की याचिका खारिज कर दी है।