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ग्रह नक्षत्र : 12 साल बाद कर्क राशि में उच्च होंगे देवगुरु बृहस्पति, सभी राशियों पर पड़ेगा विशेष प्रभाव

Sun, 31 May 2026 04:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, सौभाग्य और समृद्धि का कारक माना गया है। लगभग 12 वर्षों के बाद बृहस्पति कर्क राशि में उच्च अवस्था में प्रवेश करने जा रहा है।
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वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, सौभाग्य और समृद्धि का कारक माना गया है। लगभग 12 वर्षों के बाद बृहस्पति कर्क राशि में उच्च अवस्था में प्रवेश करने जा रहा है। पं. रमेश पांडेय के अनुसार यह गोचर 21 मई 2026 से शुरू होकर विभिन्न चरणों में जून 2027 तक प्रभावी रहेगा और इसका असर सभी 12 राशियों पर दिखाई देगा।

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क्यों विशेष है यह गोचर

ज्योतिषाचार्य पं. पांडेय बताते हैं कि कर्क राशि चंद्रमा की राशि है, जो संवेदनशीलता, मातृत्व और संरक्षण का प्रतीक मानी जाती है। वहीं बृहस्पति ज्ञान और विस्तार के ग्रह हैं। जब गुरु कर्क राशि में उच्च होते हैं तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक सोच, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

राशियों पर क्या होगा असर

उनके अनुसार मेष राशि वालों को भूमि, भवन और वाहन से जुड़े लाभ मिल सकते हैं जबकि मिथुन और कर्क राशि के जातकों के लिए आर्थिक और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग बनेंगे। वृश्चिक और मीन राशि के लोगों के लिए यह गोचर विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है। वृषभ राशि वालों को आय बढ़ाने के लिए लगातार काम करना होगा, सिंह राशि को आध्यात्मिक उन्नति और भीतर की यात्रा के लिए बेहतरीन है।
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कन्या राशि वालों को दोस्तों की मदद से कॅरिअर में मदद मिलेगी, तुला राशि वालों के कॅरिअर में बड़े और निर्णायक बदलाव आ सकते हैं वहीं धनु वालों को कुछ अलग करने की प्रेरणा मिलेगी। मकर राशि वालों के कारोबार और विवाह में शुभता आएगी, कुंभ वालों के लिए यह साल आर्थिक रूप से अच्छा होगा।

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क्या बरतें सावधानी

पं. पांडेय का कहना है कि उच्च का गुरु जहां ज्ञान और अवसर देता है वहीं अहंकार से बचने की भी सीख देता है। इस दौरान स्वास्थ्य, खानपान और आर्थिक अनुशासन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

गुरु कृपा के लिए उपाय

पं निशांत त्रिपाठी ने बताया कि गुरुओं, माता-पिता और बड़ों का सम्मान करना, सत्य का पालन करना और ज्ञान का निस्वार्थ दान करना गुरु को प्रसन्न करने के सबसे प्रभावी उपाय हैं। इसके अलावा विष्णु सहस्रनाम का पाठ और नियमित पूजा-पाठ भी शुभ फल प्रदान कर सकता है। 
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