हाईकोर्ट स्थित न्यायविद हनुमान मंदिर।
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हाईकोर्ट चौराहे पर स्थित न्यायविद हनुमान मंदिर के नाम पर हो रहे नवनिर्माण के खिलाफ वकीलों के एक गुट ने जनहित याचिका दाखिल की है। मांग की गई है कि नए मंदिर के निर्माण के बजाय पुराने हनुमान मंदिर को ही सुरक्षित और संरक्षित किया जाना चाहिए। दलील दी गई कि मंदिर के नवनिर्माण से वकीलों, वादकारियों और आम लोगों के अवागमन में अवरोध पैदा होने के साथ ही पहले से वर्ष 1936 में स्थापित न्यायविद हनुमान मंदिर का पुरातन और ऐतिहासिक महत्व भी कम हो जाएगा।
जनहित याचिका के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति और स्वामित्व व कब्जे के बगैर सार्वजनिक भूमि पर किसी भी तरह का नव निर्माण गैरकानूनी है। जबकि, प्राचीनकाल से मौजूद न्यायविद हनुमान मंदिर प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1971 से संरक्षित किया जा सकता है।
याचिका दाखिल करने वालों में अधिवक्ता सुनीता शर्मा, योगेंद्र प्रताप पांडेय, प्रियंका श्रीवास्तव शामिल हैं। इन्होंने अपनी याचिका में प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी प्रयागराज, प्रयागराज विकास प्राणिकरण, नगर आयुक्त के साथ ही हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को भी पक्षकार बनाया है।