विकास प्राधिकरण की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि फ्लैट आवंटन में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। साथ ही उन्होंने याची की विश्वसनीयता पर आपत्ति दर्ज कराई। पीडीए के वकील ने कहा कि याची संस्था का नाम प्रथमदृष्टया संदेहास्पद लगता है। यह संस्था पंजीकृत नहीं है।
वरिष्ठ अधिवक्ता की आपत्ति पर याची ने संशोधन प्रार्थना पत्र दाखिल किया और स्पष्ट किया कि याचिका त्रुटिवश गलत नाम से दाखिल हो गई और वह सुस्पष्ट साक्ष्यों और तथ्यों के साथ नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता चाहता है। कोर्ट ने याची द्वारा जनहित याचिका वापस लेने की प्रार्थना को स्वीकार कर याचिका को खारिज कर दिया।