पांच विधान सभा सीटों शहर उत्तरी, पश्चिमी, फाफामऊ, सोरांव और फूलपुर को मिलाकर बनी इस संसदीय सीट पर इस बार विकास और कानून -व्यवस्था का सवाल पीछे छूटता नजर आ रहा है। बेरोजगारी, महंगाई के सवाल पर युवा भी यहां बटते नजर आए।
सूबे के हॉट सीट फूलपुर में अबकी तीसरी बार कमल खिलेगा या साइकिल दौड़ेगी, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। इस सीट पर फूलपुर विस क्षेत्र से भाजपा के तीन बार के विधायक रहे प्रवीण पटेल और गठबंधन के सपा उम्मीदवार अमरनाथ मौर्य के बीच किला बचाने और किला ढहाने की तगड़ी लड़ाई है। इस सीट पर बसपा ने कांशीराम के निकट रह चुके अपने पुराने कॉडर जगन्नाथ पाल को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन मुकाबला सिर्फ भाजपा और गठबंधन के बीच ही माना जा रहा है।
पांच विधान सभा सीटों शहर उत्तरी, पश्चिमी, फाफामऊ, सोरांव और फूलपुर को मिलाकर बनी इस संसदीय सीट पर इस बार विकास और कानून -व्यवस्था का सवाल पीछे छूटता नजर आ रहा है। बेरोजगारी, महंगाई के सवाल पर युवा भी यहां बटते नजर आए। देश के प्रथम प्रधानमंत्री रहे पं. जवाहर लाल नेहरू की सियासी कर्मभूमि रही फूलपुर में भी इस बार जातीय समीकरण और भाजपा के परंपरागत मतों में बिखराव ने मुश्किल पैदा की है।
विज्ञापन
कुर्मी बाहुल्य इस क्षेत्र में दबदबा रखने वाली सांसद केशरी देवी पटेल का टिकट कटने से जहां अंदरखाने भितरघात का सामना करना पड़ा है। वहीं अमरनाथ मौर्य को उम्मीदवार बनाकर सपा ने यादव, मुस्लिम के साथ कुशवाहा बिरादरी को गोलबंद करने में बहुत हद तक कामयाबी हासिल की है। यहां भी पटेल और दलित मतों में बिखराव हुआ है। ऐसे में सेहरा किसके सिर सजेगा, कहना जल्दबाजी होगी।