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विवादों के घेरे में कुंभ की फोटोग्राफी प्रतियोगिता

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कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता के निर्णायकों के पते फर्जी निकले
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क्रासर
दिव्य कुंभ को दर्शाने वाली प्रतियोगिता पर विवाद की छाया, छायाकारों में मचा घमासान
कुंभ मेला प्रशासन ने एडीएम की अध्यक्षता में गठित की दूसरी कमेटी से मांगी है रिपोर्ट
अनूप ओझा
प्रयागराज। विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक -आध्यात्मिक समागम के रूप में आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता विवादों केघेरे में आ गई है। इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के सदस्यों को लेकर छायाकारों केबीच घमासान मचा है। निर्णायक मंडल के जिन दो सदस्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का छायाकार बताया गया था, उनके बारे आरटीआई के जरिए चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। निर्णायक मंडल के एक सदस्य की ओर से दिए गए जिस पते पर मेला प्राधिकरण ने पत्राचार किया है, वह पता फर्जी निकलने के बाद अफसर सन्न रह गए हैं। शिकायत मिलने के बाद कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने इस मामले की जांच के लिए एडीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। उन्होंने बताया कि दूसरी कमेटी से रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले में निष्पक्ष कदम उठाया जाएगा।
इस मामले की शिकायत निकॉन कॉटेस्ट विजेता व प्रसिद्ध फोटोग्राफर कृष्ण देव ने कुंभ मेला प्रशासन से की थी। उन्होंने निर्णायक मंडल के सदस्यों के अनुभव व उनके चयन के आधार के बारे में आरटीआई के जरिए जब मेला प्रशासन से जानकारी मांगी , तब कई रोचक तथ्य सामने आए। निर्णायक मंडल के दो सदस्यों में एक जसविंदर सिंह ओबेराय व दूसरे मनीष खत्री हैं। मेला प्राधिकरण ने इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के सदस्य के तौर पर मनीष खत्री से बीएचयू के दृश्य कला संकाय के पते पर पत्राचार किया था। आरटीआई के जवाब में बीएचयू के उप कुलसचिव प्रशासन ने साफ कहा है कि इस नाम का कोई व्यक्ति कुंभ मेला के दौरान दृश्यकला संकाय में कार्यरत था ही नहीं। निर्णायक मंडल के दूसरे सदस्य के पते की भी तस्दीक आरटीआई के जरिए नहीं हो सकी है। निर्णायक मंडल के सदस्यों ने 3.75 सेकेंड में एक फोटो देख कर कुल 4764 प्रवृष्टियों को कुछ घंटों के भीतर कैसे परखा इस पर सवाल खड़े किए गए हैं। कुंभ को यादगार बनाने के लिए 22 लाख रुपये की पुरस्कार राशि के वितरण के साथ कुल 30 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया था। प्रथम पुरस्कार के लिए जिस तस्वीर का चयन किया गया, उस पर भी उंगली उठाई गई है। कहा गया है कि कूड़ा ट्राली में बैठे दो बच्चों की चयनित तस्वीर न प्रयागराज संगम और ना ही कुंभ मेले की दैनिक धार्मिक गतिविधियों का ही प्रतिनिधित्व करती है।
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इनसेट
एक ही प्रतिभागी के नाम से कई प्रविष्टियां
प्राधिकरण द्वारा केवल प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ग में नकद पुरस्कार के रूप में 1लाख रुपये, 75 हजार रुपये और 50 हजार रुपये की धनराशि रखी गई थी। इसमें बिना घोषणा के सांत्वना पुरस्कार अलग से जोड़ दिए गए। जबकि पांच लाख रुपये के कुंभ फोटोग्राफी के भव्य पुरस्कार को घोषित ही नहीं किया गया। इस भव्य पुरस्कार के लिए सबसे अच्छी प्रविष्टि का चयन किया जाना था। शिकायत के मुताबिक कुल प्रतियोगिता में शामिल कुल 4764 प्रविष्टियों में एक ही प्रतिभागी के नाम से कई प्रविष्टियां जमा की गई हैं, जो नियम के विपरीत है ।
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