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फोटो दिखाते थे मॉडल के, बायोडेटा और नंबर होते थे फर्जी 

Mon, 07 Dec 2020 01:07 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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prayagraj news : प्रयागराज में फर्जी मेट्रोमोनियल साइट चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश। - फोटो : prayagraj
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सिविल लाइंस में फर्जी मेट्रीमोनियल साइट से लोगों से ठगी करने वाले बेहद शातिराना ढंग से काम को पिछले दो सालों से अंजाम दे रहे थे। साइट के दफ्तर पर पहुंचने वालों से रजिस्ट्रेशन के नाम पर मोटी रकम ली जाती थी। उसके बाद उन्हें एक से बढ़कर एक मॉडल लड़के-लड़कियों के फोटो और बायोडेटा उपलब्ध करा दिए जाते। जब लोग बायोडेटा में दिए गए नंबरों पर संपर्क करते तब उन्हें झटका लगता। या तो नंबर बंद होते या फिर उस पर बात करने वाले लड़के-लड़कियां शादी से इनकार कर देते। 

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 कुछ दिन पहले एडीजी प्रेम प्रकाश को लखनऊ के दिनेश कुमार ने इस फर्जी साइट के बारे में जानकारी दी और बताया कि  सिविल लाइंस में इसका दफ्तर है। एडीजी के निर्देश पर पुलिस ने फर्जी साइट संचालकों को पकड़ने के लिए स्टिंग ऑपरेशन की योजना बनाई। मामले का पता लगाने के लिए महिला थाने की कांस्टेबिल अनीता कस्टमर बनीं तो एसओ दीपा सिंह उसकी मां बनकर बिग बाजार के पास मेट्रीमोनियल साइट के दफ्तर पहुंचीं।

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फ्रॉड। - फोटो : अमर उजाला
कार्यालय में महिला कांस्टेबल अनीता ने खुद को सामान्य युवती बताते हुए कहा कि उन्हें शादी करनी है। वहां मौजूद युवती ने कहा कि वह रजिस्ट्रेशन करा लें। इसके बाद उनसे छह से 12 हजार रुपये के रजिस्ट्रेशन के लिए कहा गया। बताया गया कि छह हजार रुपये देने वालों को छह महीने और 12 हजार देने वालों को एक साल का सब्सक्रिप्शन मिलता है यानी कि एक साल तक मेट्रीमोनियल साइट पर रजिस्टर कराने वाले लड़के या लड़कियों की फोटो और बायोडेटा फोन नंबर समेत उपलब्ध करा दिए जाते हैं। महिला कांस्टेबल ने रुपये देकर रजिस्ट्रेशन कराया तो उन्हें तमाम फोटो और बायोडाटा भेज दिए गए। बाद में जब महिला एसओ दीपा सिंह ने बायोडेटा में दिए नंबरों को चेक किया तो सभी फर्जी निकले। इसके बाद तुरंत फोर्स को बुला लिया गया। 

दो सालों से चलता रहा था फर्जीवाड़ा 

अब तक की जांच से पता चला है कि मेट्रोमोनियल साइट पर जाने के बाद के बाद लड़की या लड़के को तमाम फोटोग्राफ और बायोडेटा दे दिया जाता था। रजिस्ट्रेशन के बाद जो नंबर उपलब्ध कराए जाते वह या तो फर्जी होते या फिर नंबर दफ्तर में काम करने वाली लड़कियों या लड़कों के होते। बात करने पर वे शादी के लिए साफ मना कर देते थे। तमाम नंबर गलत होते या फिर बंद मिलते थे। यह फ्राड दो सालों से चल रहा था। लखनऊ के रहने वाले दिनेश कुमार ने जब एडीजी से शिकायत की तो पूरे मामले का पता चला। 
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