अमरूद की बागवानी करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब फलों को कीड़ों से बचाने के लिए महंगे और जहरीले कीटनाशकों पर अधिक खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि फेरोमोन ट्रैप अमरूद के बागों में कीट प्रबंधन की सबसे सस्ती और सुरक्षित तकनीक है।
उद्यान विभाग के प्रभारी विजय कुमार सिंह ने बताया कि खुसरोबाग में अमरूद के पेड़ों पर फेरोमोन ट्रैप का ट्रायल किया गया जो पूरी तरह सफल रहा। अब किसानों को इस तकनीक के बारे में जानकारी दी जा रही है और उन्हें अपने बागों में इसका प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि लुयोर एक खास तरह की गंध होती है जिसे मादा पतंगा छोड़ती हैं। इस गंध से नर पतंगे आकर्षित होकर फेरोमोन ट्रैप में फंस जाते हैं और बाहर नहीं निकल पाते। फेरोमोन ट्रैप में प्लास्टिक के डिब्बे में लुयोर लगाया जाता है। जब नर कीट इसमें फंस जाते हैं तो उनकी संख्या और प्रजाति का आसानी से पता चल जाता है। इससे किसानों को सही समय पर कीट नियंत्रण की रणनीति बनाने में मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ में छह से आठ ट्रैप लगाने से कीटों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। वहीं बड़े पैमाने पर कीट नियंत्रण के लिए मास ट्रैपिंग तकनीक अपनाई जाती है जिसमें दो से चार ट्रैप प्रति एकड़ पर्याप्त माने जाते हैं। ट्रैप की एक-दूसरे से दूरी 30-40 मीटर व ऊंचाई हमेशा फसल से 1-2 फीट ऊपर रखनी चाहिए।
विजय ने बताया कि फेरोमोन ट्रैप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों को अनावश्यक कीटनाशक के छिड़काव से निजात मिलेगी। इससे न केवल खर्च कम होगा बल्कि मिट्टी और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।
उनका दावा है कि इस तकनीक से अमरूद सहित अन्य फलों की पैदावार में बढ़ोतरी संभव है। साथ ही अमरूद के बागानों में फेरोमोन ट्रैप का प्रयोग करने से फलों की गुणवत्ता बेहतर होगी और किसानों को बाजार में अधिक दाम भी मिल सकेगा।
इस तकनीक से किसानों को मिलने वाले लाभ
1. कीटनाशकों पर खर्च कम।
2. अमरूद के फलों में कीड़ों का प्रकोप घटेगा।
3. उत्पादन बढ़ेगा।
4. पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
5. लागत कम होने से लाभ अधिक मिलेगा।
आवश्यक सावधानियां
1. ट्रैप के अंदर रखे गए लुयोर को माह में एक बार अवश्य बदलें।
2. लुयोर ठंडे एवं सूखे स्थान पर भंडारित करें।
3. उपयोग किए गए लुयोर को नष्ट कर दें।