इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत को आत्महत्या के बजाय हत्या बताते हुए सीबीआई जांच कराने की मांग वाली याचिका को रिकॉर्ड में दाखिल कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि शव उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में घटना के तरीके और मौत के कारण की आगे जांच नहीं की जा सकती। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार द्वितीय की खंडपीठ ने मधु दुबे की याचिका पर दिया।
भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत मामले में वाराणसी के सारनाथ थाने में 27 मार्च 2023 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मां मधु दुबे ने जांच सीबीआई को सौंपने अथवा दोबारा जांच कराने की मांग करते हुए याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मामले में आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या) के तहत तीन जून 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। साथ ही संबंधित मजिस्ट्रेट ने छह जून 2023 को संज्ञान भी ले लिया।
वहीं याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि चिकित्सकीय और फॉरेंसिक परीक्षण में पीड़िता के निजी अंग से ऐसे साक्ष्य पाए गए जिनका आरोपी से मिलान हुआ था। ऐसे में मृतका की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या थी। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के खिलाफ दोबारा चिकित्सकीय परीक्षण के लिए कोई आपत्ति दाखिल की गई थी। याची के अधिवक्ता ने ऐसी कोई आपत्ति दाखिल नहीं होने की बात कही। खंडपीठ ने कहा कि शव उपलब्ध नहीं होने के कारण घटना के तरीके और मौत के कारण की जांच संभव नहीं है और याचिका को रिकॉर्ड में दाखिल करने का आदेश दिया।