इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ में लाउडस्पीकर लगाने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी। कहा कि रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चलता है कि घोषणाओं आदि के लिए लगाए गए लाउडस्पीकरों की कुछ तस्वीरें पेश की गई हैं। ऐसी कोई सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे यह पता चले कि सार्वजनिक संबोधन के लिए लगाए गए लाउडस्पीकर अधिनियम और नियमों के विपरीत शोर कर रहे हैं।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने उत्तराखंड निवासी याचिकाकर्ता ब्रह्माचारी दयानंद व एक अन्य की जनहित याचिका पर दिया। ये लोग महाकुंभ के सेक्टर-18, मुक्तिमार्ग में शिविर लगाकर रह रहे हैं। याचिका में दलील दी कि उनके शिविर के आसपास स्थापित अन्य शिविर लाउडस्पीकर व एलसीडी का प्रयोग कर रहे हैं। इससे ध्वनि प्रदूषण हो रहा है और उनके ध्यान आदि पर असर पड़ रहा है। याचिका में लाउडस्पीकर व अन्य ध्वनि प्रदूषणकारी उपकरणों पर रोक लगाने के मांग की थी।